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किसान मजदूर संगठन (पूरन) ने सहारनपुर कमिश्नरी से किसान मजदूर पदयात्रा की करी शुरुआत

किसान मजदूर संगठन (पूरन) ने सहारनपुर कमिश्नरी से किसान मजदूर पदयात्रा की करी शुरुआत

किसान मजदूर संगठन (पूरन) ने सहारनपुर कमिश्नरी से किसान मजदूर पदयात्रा की करी शुरुआत, राजघाट दिल्ली पहुंचकर लड़ेंगे किसानों के हक की लड़ाई, सैकड़ो किसानों ने सहारनपुर कमिश्नर ऑफ़िस से दिल्ली राजघाट के लिए किया कूच।


किसान मजदूर संगठन (पूरन) के बैनर तले आज सहारनपुर कमिश्नरी से किसान मजदूर पदयात्रा की शुरुआत की गई जिसमें सैकड़ो किसानों ने सहारनपुर कमिश्नर ऑफ़िस से दिल्ली राजघाट के लिए कूच किया। यात्रा की शुरआत के दौरान किसानों ने हवन पूजन से पदयात्रा का आरम्भ किया साथ ही ढोल की थाप पर सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 

किसानों ने 20 सूत्रीय मांगों के साथ सहारनपुर से पदयात्रा करते हुए राजघाट दिल्ली पहुंच कर 2 अक्टूबर गांधी जयंती मानने और वंही किसानों के हक की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।

मीडिया से बात करते हुए किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह ने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला उन्होंने कहा कि, 2017-19 में जिन जनप्रतिनिधियों को हमने चुन कर सदन भेजने का काम किया, वो हमारे हक की लड़ाई लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में लड़ सकें, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि वो नेतागण अपने भत्तों, पेंशन के लिए लड़ते रहे लेकिन एक बार भी वो किसानों के अधिकारों के लिए नही लड़े है। 

यही कारण है कि, किसान पिछले 10 महीनों से सड़कों पर है। उन्हीने कहा कि अब की बार सरकार उसकी बनेगी जो किसानों की बात करेगा, समय पर गन्ने का भुगतान देगा, हमारे बच्चों को नोकरी देगा। इस बार राजनीतिक घोषणा पत्र ना बनकर किसान घोषणा पत्र बनाएगा। 

उन्होंने प्रधानमंत्री की मुफ्त अन्न योजना पर कटाक्ष करते हुए कहा कि माल हमारा है और उपलब्धि सरकार अपने नाम गिनवा रही है क्या कभी प्रधानमंत्री ने अन्न उगाया है साथ ही उन्होंने कहा कि अनाज वितरण के दौरान थैले पर अगर पीएम की जगह किसान की फोटो होती तब हमें खुशी होती।

उन्होंने कहा कि सहारनपुर से पदयात्रा शुरू होकर राजघाट दिल्ली तक पहुंचेगी जँहा 2 अक्टूबर गांधी जयंती मनाई जाएगी और वंही से किसानों के हक की लड़ाई-लड़ने का काम किया जाएगा।

सहारनपुर में कमिश्नर ऑफिस परिसर में किसानो को सम्बोधित करते हुए कहा की किसानों को हर गांव में किसान थाने बनाने होगें, जिनमें किसानों का उत्पीड़न करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को बंद करा जाऐंगा। उन्होंने कहा कि यही सरकार सन् 2017 में जब विपक्ष में थी तो बढ़ती मंहगाई को लेकर सरकार को घेरती थी, इसी बलबूते पर सरकार सत्ता में आई। लेकिन सत्ता में आने के बाद सभी वायदे को भूल गई। 

भाजपा सरकार में किसानों को बकाया गन्ने का भुगतान नही मिल रहा है। ना ही गन्ने के भाव में बढ़ोतरी हो रही है। जबकि बिजली के बिलों, डीजल, पेट्रोल, एवं गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है इस सरकार में किसानों का जमकर उत्पीड़न किया जा रहा है, जब विधायको एव सांसदो की पेंशन 85000 रूपये हो सकती हैं किसानों की पेशन 5000 रूपये प्रति महा क्यों नही हो सकती है। 

Report: सुहेल गौर


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