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मां के दर्शनमात्र से लौटती आंखों की रोशनी

मां के दर्शनमात्र से लौटती आंखों की रोशनी

Maa barahi Devi mandir: नवरात्र के पहले दिन से ही शक्तिपीठ बाराही देवी धाम में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो चुका है, मंदिर के सामने प्रसाद, चुनर और फूलों की मनमोहक दुकानें सजी हुई हैं, ऐसा कहा जाता है कि बाराही देवी धाम के दर्शन मात्र से भक्तों के दुख दूर हो जाते है।मां बाराही की बात ही निराली है।

गोण्डा:देश के 34वे शक्तिपीठ में माना जाता मां बाराही देवी का मंदिर,मंदिर का  नीर व वट वृक्ष का दूध लगाने से दूर होते आंखों के सारे रोग | CRIME JUNCTION

जिला मुख्यालय से करीब 35 किलो मीटर की दूरी पर तरबगंज तहसील के सूकर क्षेत्र के मुकंदपुर में शक्तिपीठ बाराही देवी का मंदिर बना हुआ है, नवरात्रि के दिनों में यहां लाखों में श्रद्धालु मां के दर्शन करने आते हैं, लोगों का मानना है कि इस स्थान पर बाराही मां के दर्शन मात्र से ही भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं।

मान्यता है कि नवरात्र में आंख से पीड़ित व्यक्ति अगरमां के मंदिर में कल्पवास करने के साथ साथ मन्दिर का नीर एवं बरगद का दुग्ध आखों पर लगाने से आंखों की ज्योति फिर से वापस आ जाती है, वहीं इस मंदिर मे दर्शन के लिए आस-पास के जिलों के अलावा दूसरे प्रदेश से भी भारी संख्या में लोग आते हैं, बतादें कि मां बाराही मंदिर को उत्तरी भवानी के नाम से भी जाना जाता है।

महंत बोले- मान्यता है कि वटवृक्ष से निकलने वाले दूध से आंखों की रोशनी वापस  आ जाती है, प्रतीकात्मक चढ़ाते हैं नेत्र | Devotees throng to see Barahi Devi  in Gonda ...

क्या है बाराही मंदिर का इतिहास-

बतादें कि वाराह पुराण कहा गया है, जब हिरण्य कश्यप के भाई हिरण्याक्ष का पूरे पृथ्‍वी पर आधिपत्‍य हो गया था, तो देवताओंऔरसाधू-सन्‍तों के साथ साथ ऋषि मुनियों पर अत्‍याचार बढ़ा हुआ था, तभी हिरण्याक्ष का वध करने के लिये भगवान विष्णु ने वाराह का रूप धारण किया।

जानकारी के मुताबिक भगवान विष्णु ने जब पाताल लोक पंहुचने के लिये शक्ति की आराधना की, तो मुकुन्दपुर में सुखनोई नदी के तट पर मां भगवती बाराही देवी के रूप में प्रकट हुईं, इस मन्दिर में स्थित सुरंग से भगवान वाराह ने पाताल लोक जाकर हिरण्याक्ष का वध किया था, तभी से ये मन्दिर अस्तित्व में आया, इसे कुछ लोग बाराही देवी और तो कुछ लोग उत्‍तरी भवानी के नाम से जानने लगे, मंदिर के चारों तरफ फैली वट वृक्ष की शाखायें, इस मन्दिर के पुराना होने का प्रमाण है।

मान्यता है कि हजारों साल पुराने वट वृक्ष के पत्तों का दूध मात्र आंखों में लगाने से खोई हुई रोशनी वापस आ जाती है.इसी लिए नवरात्रि में माता के भक्तों तांता लगा रहता है. देश भर के कोने-कोने से लोग यहां पर आते है और माता से अपनी अर्जी लगाते हैं. माता रानी सभी भक्तों की मनोकामना को पूरा भी करती है।

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मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने बनवाया मंदिर

मंदिर प्रांगण मे कई छोटे-छोटे मंदिर और धर्मशालाएं हैं, जिन्हें मन्नतें पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं ने बनवाया है, यहां पर हर समय कोई न कोई भक्त भागवत कथा सुनता रहता है, और भण्डारे के का भी आयोजन किया जाता है, इस मंदिर में मुण्‍डन से लेकर कई शुभ संस्‍कार कराए जाते हैं, नवरात्र में इस पावन धाम में भारी संख्‍या में दुकानें, बाजार  सजते है, और बच्चों से लेकर बड़े –बूढ़े तक इस पावन पर्व को उत्साह से मनाते है।


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