Abhishek Banerjee News: कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल पीठ ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने विधानसभा में विधायक हस्ताक्षर गड़बड़ी मामले को लेकर सीआइडी के समन को चुनौती दी थी। जस्टिस चैताली चट्टोपाध्याय की पीठ के समक्ष जब मामला आया, तो अदालत ने अभिषेक बनर्जी के वकीलों द्वारा की गई ‘जल्द सुनवाई’ (Urgent Hearing) की अपील को खारिज कर दिया। अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में सीआइडी की ओर से किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई, जैसे कि गिरफ्तारी, से अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी।
अभिषेक बनर्जी और CID समन
विवाद की शुरुआत तब हुई जब अभिषेक बनर्जी को पहली बार एक जून को सीआइडी के समक्ष पेश होने का समन मिला था। हालांकि, सांसद ने उस तारीख पर उपस्थित होने के बजाय 15 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा। अभिषेक बनर्जी ने तर्क दिया कि 30 मई को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में उनके साथ हुई कथित सार्वजनिक झड़प/हमले के बाद उनकी शारीरिक स्थिति सही नहीं है, जिसके कारण वे जांच में शामिल होने में असमर्थ हैं। इस अनुरोध के बावजूद, सीआइडी ने एक जून की शाम को दूसरा नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें आठ जून को भवानी भवन स्थित सीआइडी दफ्तर में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
विधायक नामांकन विवाद
पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के अहम पदों के लिए विधायकों के नामांकन से जुड़ा है। अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथींद्र बोस को पत्र लिखकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, नयना बंदोपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नामित करने का प्रस्ताव रखा था। प्रक्रिया के तहत, स्पीकर ने स्पष्ट किया कि इन नामांकनों के समर्थन में संबंधित विधायकों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव अभिषेक बनर्जी के पत्र के साथ संलग्न होना चाहिए।
CID जांच का दायरा
विवाद तब गहरा गया जब नामांकन प्रस्ताव विधानसभा कार्यालय में जमा हुआ, लेकिन टीएमसी के ही दो विधायकों—ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा—ने स्पीकर को लिखित शिकायत दी कि प्रस्ताव में कई विधायकों के हस्ताक्षर वास्तविक नहीं हैं और वे मेल नहीं खा रहे हैं। इस गंभीर आरोप के सामने आने के बाद, विधानसभा सचिवालय ने पूरे मामले की आंतरिक जांच सीआइडी को सौंप दी। अब जांच एजेंसी सीआइडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किसने किए और इसके पीछे किसकी भूमिका है। अभिषेक बनर्जी को इसी मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा गया है, जिसे लेकर कानूनी लड़ाई जारी है।










