गरुड़ पुराण के अनुसार रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता, जानिए धार्मिक कारण

जैसे दिन के बाद रात होना निश्चित है, ठीक उसी प्रकार यह भी निश्चित है कि जिसने इस मृत्यु लोक में जन्म लिया है, उसे एक न एक दिन मृत्यु का सामना अवश्य करना पड़ता है. यानी पृथ्वी लोक का सबसे बड़ा सत्य है- मृत्यु. फिर भी कुछ लोग इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाते है. आपने अक्सर देखा होगा कि हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार किया जाता है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका अंतिम संस्कार उसी समय नहीं किया जाता, बल्कि अगले दिन किया जाता

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Published On :

जून 26, 2026

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जैसे दिन के बाद रात होना निश्चित है, ठीक उसी प्रकार यह भी निश्चित है कि जिसने इस मृत्यु लोक में जन्म लिया है, उसे एक न एक दिन मृत्यु का सामना अवश्य करना पड़ता है. यानी पृथ्वी लोक का सबसे बड़ा सत्य है- मृत्यु. फिर भी कुछ लोग इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाते है.

आपने अक्सर देखा होगा कि हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार किया जाता है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका अंतिम संस्कार उसी समय नहीं किया जाता, बल्कि अगले दिन किया जाता है. ऐसे में एक बात और ध्यान देने वाली होती है कि शव को रात भर कभी भी अकेला नहीं छोड़ा जाता है. लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है? आइए, इसके पीछे के धार्मिक कारणों को समझते हैं, जिनका उल्लेख गरुड़ पुराण में मिलता है. किन परिस्थितियों में टाल दिया जाता है अंतिम संस्कार?

किन स्थितियों में दाह संस्कार को कुछ समय के लिए रोका जाता है?
गरुड़ पुराण के मुताबिक, यदि मृत्यु सूर्यास्त के बाद हो जाए या यदि मृत्यु पंचक काल में हो तो ऐसी परिस्थितियों में शव को घर पर ही रखा जाता है. शुभ समय आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाता है. मान्यता है कि इन समयों में दाह संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है.

शव को अकेला क्यों नहीं छोड़ा जाता है?
1. जानवरों से सुरक्षा
गरुड़ पुराण के मुताबिक, अगर शव को अकेला छोड़ दिया जाए, तो कुत्ते या अन्य जानवर उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं. मान्यता है कि इससे मृत आत्मा को भी यमलोक की यात्रा में कष्ट झेलने पड़ते हैं.

2. दुर्गंध से बचाव
मृत शरीर से कुछ समय बाद दुर्गंध आने लगती है. इसलिए वहां किसी का उपस्थित रहना जरूरी होता है, जो धूप या अगरबत्ती जलाकर वातावरण को शुद्ध रखे.

3. नकारात्मक शक्तियों का डर
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि रात के समय आसपास भटकने वाली नकारात्मक या दुष्ट आत्माएं मृत शरीर में प्रवेश कर सकती हैं. इससे मृतक और उसके परिवार को कष्ट झेलने पड़ सकते हैं.

4. आत्मा की उपस्थिति
ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के बाद कुछ समय तक आत्मा अपने शरीर के आसपास ही रहती है और अपने परिजनों को देखती रहती है. इसलिए शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता.

संतान का इंतजार भी होता है जरूरी
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु, गरुड़ जी से कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसकी संतान उपस्थित न हो, तो अंतिम संस्कार को तब तक टाला जा सकता है जब तक पुत्र या पुत्री आ न जाए. मान्यता है कि जब तक संतान मुखाग्नि नहीं देती, तब तक आत्मा को पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती है.

रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार किया जाए, तो आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है और उसे निम्न योनि जैसे असुर, पिशाच आदि, में जन्म लेना पड़ सकता है.

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