‘लोकतंत्र को खतरे में डालने का आरोप’, SC ने ममता बनर्जी को मतदान से पहले दी फटकार

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी और झकझोर देने वाली खबर आई है. अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद सख्त और तीखी टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के बीच में हस्तक्षेप करना गंभीर मामला है. यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री

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Published On :

अप्रैल 22, 2026

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नई दिल्ली
 पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी और झकझोर देने वाली खबर आई है. अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री के आचरण पर बेहद सख्त और तीखी टिप्पणी की है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने ममता बनर्जी को फटकार लगाते हुए कहा कि जांच के बीच में हस्तक्षेप करना गंभीर मामला है. यह पूरा विवाद कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की सर्च कार्रवाई से जुड़ा है. कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि किसी राज्य का मुख्यमंत्री जांच की प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता. इस मामले ने अब कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां ममता सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। 

‘मुख्यमंत्री ने जांच के बीच दखल देकर सिस्टम को खतरे में डाला’
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद हैरान करने वाली बात कही है. बेंच ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री खुद जांच के बीच में दखल देगा. कोर्ट के मुताबिक यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद बिल्कुल नहीं है. यह एक ऐसा मामला है जहां एक व्यक्ति, जो मुख्यमंत्री के पद पर है, वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। 

अदालत ने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कृत्य ने पूरे सिस्टम को जोखिम में डाल दिया है। 

सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से दलील दी गई कि यह मामला संघीय विवाद से जुड़ा है. हालांकि कोर्ट इस तर्क से बिल्कुल सहमत नजर नहीं आया. कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री जांच के बीच नहीं जा सकता. आप इसे केंद्र-राज्य का विवाद बताकर अपना बचाव नहीं कर सकते हैं। 

बेंच ने संविधान विशेषज्ञों का जिक्र करते हुए कहा कि सीरवाई और आंबेडकर जैसे दिग्गजों ने भी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी. किसी ने नहीं सोचा था कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री खुद जांच के दौरान दफ्तर में पहुंच जाएगा। 

क्या इस मामले की सुनवाई अब पांच जजों की बड़ी बेंच करेगी?

टीएमसी की वकील मेनका गुरुस्वामी ने इस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए और मामले को 5 जजों की बेंच के पास भेजने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने पूछा कि आखिर इसमें ऐसा कौन सा बड़ा संवैधानिक सवाल है जिसे बड़ी बेंच को भेजा जाए? अदालत ने साफ किया कि हर अनुच्छेद 32 की याचिका को बड़ी बेंच को नहीं सौंपा जा सकता. यह सुनवाई ईडी अधिकारियों द्वारा दायर उन याचिकाओं पर हो रही है जिनमें सीबीआई जांच की मांग की गई है। 

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