UP News: योगी आदित्यनाथ के ‘करप्ट माउथ’ पर अखिलेश का पलटवार, सीएम के पुराने दिनों पर उठाए गंभीर सवाल

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा 'टोंटी चोरी' पर की गई टिप्पणी ने यूपी की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए सीएम की भाषा और उनके शुरुआती राजनीतिक सफर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस लेख में जानिए, आखिर क्या है यह 'टोंटी' विवाद और क्यों अखिलेश ने सीएम के अतीत पर निशाना साधा है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 6, 2026

UP News:  उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर सीएम योगी द्वारा ‘टोंटी’ को लेकर किए गए कटाक्ष पर अखिलेश यादव ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पलटवार किया है। अखिलेश ने न केवल सीएम की भाषा पर सवाल उठाए, बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन और अतीत की घटनाओं पर भी गंभीर टिप्पणियां कीं।

विज्ञान और मनोविज्ञान के जरिए CM योगी की भाषा पर तंज

अखिलेश यादव ने सीएम के बयान को उनकी ‘करप्ट माउथ’ (दूषित भाषा) होने की निशानी बताया। उन्होंने विज्ञान और मनोविज्ञान का सहारा लेते हुए लिखा कि किशोरावस्था में खान-पान और शुरुआती अनुभव व्यक्ति के व्यवहार व संस्कार निर्धारित करते हैं। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में सीएम की भाषा उनके उन्हीं संस्कारों को दर्शाती है। उन्होंने इसे एक ‘दबाई गई जानकारी’ करार देते हुए सीएम के व्यक्तित्व पर सवाल खड़े किए।

परिवहन व्यवसाय पर विवादित टिप्पणी

अखिलेश यादव ने इस विवाद को सीएम के अतीत से जोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट (योगी आदित्यनाथ) अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय से जुड़े थे। अखिलेश ने आरोप लगाया कि उस दौरान उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था। सपा प्रमुख ने तंज कसा कि संभवतः सीएम ने यह ‘भाषिक अभद्रता’ और कटुता उसी दौर में ‘डग्गामार’ वाहन चलवाते समय सीखी होगी, जो आज भी उनके व्यवहार में झलकती है।

‘पक्षपाती परिवारवाद’ के आरोप

सपा प्रमुख ने केवल भाषा ही नहीं, बल्कि सीएम के राजनीतिक उदय पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने गोरखनाथ मठ की उत्तराधिकार प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि महंत अवैद्यनाथ ने अजय सिंह बिष्ट को ही अपना उत्तराधिकारी क्यों चुना? अखिलेश ने इसे केवल योग्यता का नहीं, बल्कि ‘रिश्तेदारी का प्रभाव’ बताया। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय मठ में महंत चुनने के लिए कोई औपचारिक चुनाव हुआ था? साथ ही, उन्होंने इसे सीधे तौर पर ‘पक्षपाती परिवारवाद’ का उदाहरण बताते हुए सीएम पर निशाना साधा।

‘पद और परिधान’ बनाम ‘संस्कार और व्यवहार’ का द्वंद्व

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि पद और वेशभूषा तो रिश्तों और समय की अनुकूलता के कारण मिल सकते हैं, लेकिन मर्यादित भाषा और सही व्यवहार अर्जित करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे योगी के उस तंज का जवाब दे रहे हैं, जिसमें सीएम ने ‘टोंटी’ का जिक्र किया था।

CM योगी का ‘टोंटी’ वाला विवादास्पद बयान

इस पूरे विवाद की शुरुआत विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर हुई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण पर बोलते हुए कहा था, “हम हर घर नल जल योजना चला रहे हैं, लेकिन कोई टोंटी चोरी कर ले रहा है, तो कोई उसे खुला छोड़ दे रहा है।” यद्यपि सीएम ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा सपा के पुराने ‘टोंटी चोरी’ के आरोपों की ओर था। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर से पुराने विवादों के इर्द-गिर्द सिमट गई है।