UP News: काशी में शंकराचार्य से मिले पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट, SC-ST एक्ट के दुरुपयोग और UGC रेगुलेशन पर खोला मोर्चा

बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने काशी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भेंट की। उन्होंने SC-ST एक्ट को 'काला कानून' बताते हुए केंद्र सरकार को 6 फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया है। अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य के साथ भेदभाव कर रही है और वित्तीय संसाधनों को गुजरात भेजने की साजिश रच रही है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 2, 2026

UP News: वाराणसी के केदारघाट स्थित विद्या मठ में रविवार की शाम एक बड़ी आध्यात्मिक और राजनीतिक हलचल देखी गई। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भेंट कोई सोची-समझी राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि एक ‘शुभ संयोग’ है।

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आध्यात्मिक भेंट और व्यक्तिगत जुड़ाव

अग्निहोत्री ने बताया कि शंकराचार्य ने उन्हें पूर्व में प्रयागराज में आमंत्रित किया था, परंतु व्यस्तता के कारण वह तब उपस्थित नहीं हो सके थे। अब काशी आगमन पर उन्हें यह सुअवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) से शिक्षा प्राप्त करने के कारण काशी से उनका गहरा व्यक्तिगत और भावनात्मक लगाव है। इस दौरान उन्होंने शंकराचार्य के साथ वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की।

एससी-एसटी एक्ट पर कड़ा प्रहार

पूर्व मजिस्ट्रेट ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए 1989 के एससी-एसटी (SC/ST) अधिनियम को देश का सबसे बड़ा ‘काला कानून’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इस कानून के तहत दर्ज होने वाले लगभग 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं। अग्निहोत्री के अनुसार, इन झूठे मुकदमों के कारण समाज का एक बड़ा वर्ग मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर है, जिससे सामाजिक वैमनस्य बढ़ रहा है।

दिल्ली घेराव की चेतावनी

अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 6 फरवरी तक इस विवादित कानून को वापस नहीं लिया गया, तो सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि “6 फरवरी आखिरी तारीख है, अन्यथा केंद्र सरकार को उखाड़ फेंका जाएगा और उन्हें चार्टर्ड प्लेन में बिठाकर वापस गुजरात भेज दिया जाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई शुरू से ही केंद्र की नीतियों के खिलाफ थी।

भेदभाव और वित्तीय संसाधनों के हस्तांतरण का आरोप

जब उनसे राज्य सरकार के साथ शुरुआती विवाद पर सवाल किया गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया। अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री राज्य सरकार के साथ भेदभाव कर रहे हैं और उसे अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य प्रशासन भारी दबाव में है और ऐसी साजिश रची जा रही है जिससे राज्य का सारा फंड गुजरात स्थानांतरित कर दिया जाए।

सनातन संस्कृति का अपमान और प्रशासनिक त्यागपत्र की पृष्ठभूमि

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य के पवित्र स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले अग्निहोत्री ने अपने फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा, “जब मैंने अपनी आँखों के सामने सनातन संस्कृति के प्रतीकों का अपमान होते देखा, तो मेरा अंतर्मन इसे बर्दाश्त नहीं कर सका और मैंने तुरंत पद का त्याग कर दिया।”

शिक्षा में जातिगत राजनीति

29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाए जाने का स्वागत करते हुए उन्होंने शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव के संस्थागत दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन प्रावधानों के जरिए समाज को बांटने की कोशिश की गई, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम होंगे और देश में आंतरिक अशांति फैल सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जातिगत मुद्दों को केवल संवाद तक सीमित रखना चाहिए, इसे हथियार नहीं बनाना चाहिए।

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