Allahabad High Court : पत्नी की प्रताड़ना पड़ी महंगी, इलाहाबाद हाई कोर्ट का वकीलों के लिए कड़ा संदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान पेशे से वकील एक पति को अपनी पत्नी को प्रताड़ित करने का दोषी पाया। कोर्ट ने न केवल पति की दलीलों को खारिज किया, बल्कि उस पर 15 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी ठोक दिया। आखिर इस वकील ने अपनी पत्नी के साथ ऐसी क्या क्रूरता की थी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 26, 2026

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Allahabad High Court : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक वकील द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ दायर भरण-पोषण (Maintenance) मामले के शीघ्र निपटारे की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह याचिका पूरी तरह से अनावश्यक है और केवल पत्नी को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान करने के लिए ‘झूठे बहाने’ बनाकर दायर की गई थी। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने पाया कि याचिकाकर्ता ने न केवल अदालत से महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया, बल्कि कानून का दुरुपयोग कर अपनी पत्नी को गंभीर क्षति पहुंचाई। अदालत ने इस आचरण को न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ माना और पति पर 15 लाख रुपये का भारी हर्जाना ठोक दिया।

वकील पति की शर्मनाक करतूत: पत्नी का लोन लेकर शराब और विलासिता में उड़ाए पैसे

मामले की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता एक शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति है और वकालत के पेशे से जुड़ा है, फिर भी उसने काम करने के बजाय अपनी पत्नी की कमाई पर ऐश करने का रास्ता चुना। याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी को भरोसे में लेकर उसके वेतन खाते के आधार पर दो बार में लाखों रुपये का व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) लिया। कोर्ट ने पाया कि उसने करीब 13,56,000 रुपये की राशि यूपीआई के जरिए अपने खाते में ट्रांसफर की और इस पैसे को शराब पीने और विलासितापूर्ण जीवन जीने में बर्बाद कर दिया। विडंबना यह है कि पति ऐश कर रहा था और उसकी पत्नी आज भी अक्टूबर 2028 तक चलने वाली भारी मासिक किस्तों का भुगतान कर रही है।

शादी से लेकर विवाद तक: करियर की होड़ और पति की बेरोजगारी

इस मामले की शुरुआत 18 मई 2019 को हुई शादी से हुई। उस समय पति-पत्नी दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। कुछ समय बाद पत्नी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ‘अपर निजी सचिव’ के पद पर सरकारी नौकरी मिल गई, जबकि पति कानून स्नातक होने के बावजूद बेरोजगार ही रहा। इसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा। पति ने अपनी बेरोजगारी का हवाला देकर इटावा की परिवार अदालत में गुजारा भत्ते के लिए आवेदन किया, जहां उसके पक्ष में फैसला भी आया। लेकिन जब पत्नी ने इस आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की, तो पति ने हाई कोर्ट का रुख कर भरण-पोषण मामले में शीघ्रता की मांग की, जिसे कोर्ट ने दुर्भावनापूर्ण माना।

धोखाधड़ी का जाल: प्लॉट खरीदने के नाम पर पत्नी से ली बड़ी रकम

पत्नी ने अदालत को बताया कि 10 नवंबर 2020 को उसके पति ने एक भूखंड (Plot) खरीदने का झूठा नाटक रचा। उसने लखनऊ स्थित एसबीआई शाखा से पत्नी के नाम पर 11.50 लाख रुपये का ऋण लिया। इसके बाद अक्टूबर 2022 में फिर से 13.56 लाख रुपये का एक और कर्ज लिया गया। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने यह सारा पैसा धोखाधड़ी से अपने निजी इस्तेमाल के लिए हड़प लिया। पति के इसी प्रताड़ित करने वाले व्यवहार से तंग आकर पत्नी ने मई 2025 में तलाक की अर्जी दाखिल की, जिसके जवाब में पति ने मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर भरण-पोषण की मांग शुरू कर दी।

संपत्तियों की जांच और हर्जाना वसूली: कोर्ट का कड़ा निर्देश

अदालत ने याचिकाकर्ता के आचरण को अत्यंत निंदनीय बताते हुए आदेश दिया कि वह छह महीने के भीतर 15 लाख रुपये का हर्जाना डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से अपनी पत्नी को दे। यदि वह इस राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो इटावा के जिला मजिस्ट्रेट को तीन महीने के भीतर उसकी चल-अचल संपत्तियों की जांच करने और भू-राजस्व के बकाया के रूप में इस राशि को वसूलने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि कानून का इस्तेमाल किसी निर्दोष को प्रताड़ित करने के लिए ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता।

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