Amit Shah: लोकसभा में बुधवार को राजनीतिक माहौल उस समय और गर्म हो गया जब केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष के नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। शाह ने संसद में बोलने के अवसर को लेकर उठाए गए सवालों के बीच राहुल गांधी के बार-बार होने वाले विदेश दौरों को मुद्दा बनाया और कहा कि जब सदन में चर्चा के दौरान बोलने का मौका मिलता है, तब वे अक्सर विदेश में होते हैं।
यह बयान उस समय आया जब लोकसभा में स्पीकर Om Birla के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जोरदार बहस चल रही थी। इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
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विदेश दौरों को लेकर राहुल गांधी पर सवाल
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर यह आरोप लगाते हैं कि उन्हें संसद में अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जाता। शाह ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि सदन में किस सदस्य को कब बोलना है, यह काफी हद तक स्वयं सदस्यों की सक्रियता पर निर्भर करता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब भी चर्चा के दौरान बोलने का अवसर मिलता है, उस समय राहुल गांधी अक्सर जर्मनी या इंग्लैंड जैसे देशों में नजर आते हैं। शाह के अनुसार, बाद में वही नेता यह शिकायत करते हैं कि उनकी आवाज दबाई जा रही है, जो वास्तविकता से परे है।
कांग्रेस सांसदों के बोलने के आंकड़े पेश किए
अमित शाह ने अपनी बात को मजबूत करने के लिए 18वीं लोकसभा के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सांसदों ने मिलकर इस कार्यकाल में करीब 157 घंटे 55 मिनट तक सदन में अपनी बात रखी है। शाह ने सवाल उठाया कि जब पार्टी के अन्य सांसदों को बोलने का पर्याप्त समय मिला, तो राहुल गांधी ने स्वयं उन मौकों का उपयोग क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि संसद की छवि खराब करने के लिए गलत जानकारी फैलाना सही नहीं है।
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स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का रुख
बहस के दौरान अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम से संसदीय संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचती है। शाह ने यह भी याद दिलाया कि जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, तब उसने कभी भी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाने की कोशिश नहीं की। उनके मुताबिक उस समय भाजपा ने एक जिम्मेदार और रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाई और पद की गरिमा बनाए रखी।
स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाने पर चिंता
गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान में लोकसभा स्पीकर की भूमिका एक निष्पक्ष मध्यस्थ की होती है। इसलिए स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण स्तंभ को कमजोर करने जैसा है। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में संसद के दोनों सदनों ने भारतीय लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया है। ऐसे में स्पीकर की भूमिका पर संदेह जताना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए ठीक नहीं है।
चार दशक बाद आया ऐसा प्रस्ताव
अमित शाह ने यह भी बताया कि किसी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना बहुत ही दुर्लभ घटना है। उन्होंने कहा कि लगभग चार दशकों के बाद ऐसा कदम उठाया गया है, जो संसदीय राजनीति के लिए चिंताजनक संकेत है। इससे पहले कांग्रेस सांसद Mohammad Javed ने स्पीकर के खिलाफ यह प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला। कुल 118 विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए और स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। संसद में इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए लगभग 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। इस मुद्दे पर आगे भी सदन में तीखी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
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