Andhra Pradesh: वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की रैली में शामिल एक 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत का दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। यह हादसा 18 जून को पलनाडु जिले में हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी एक संवेदनात्मक रैली में भाग ले रहे थे। मृतक की पहचान वेंगलयापलेम गांव के निवासी और प्लम्बर पेशे से जुड़े चीली सिंगय्या के रूप में हुई है।
Read More: DU PG Admission 2025: 24 जून से दाखिले का दूसरा राउंड शुरु, जानें जरूरी तारीख और प्रक्रिया…
भीड़ को संभालने में विफल रही सुरक्षा
आपको बता दे कि, यह रैली ताडेपल्ली से रेन्टापल्ला तक निकाली गई थी, जिसका उद्देश्य पार्टी के एक पदाधिकारी के परिवार को सांत्वना देना था, जिन्होंने कथित रूप से पुलिस उत्पीड़न के चलते आत्महत्या कर ली थी। जैसे ही काफिला एतुकुरू के पास राजमार्ग पर पहुंचा, अफरा-तफरी के माहौल में सिंगय्या भीड़ में गिर गए और पूर्व सीएम जगन रेड्डी की कार का अगला पहिया उनके शरीर के ऊपर से गुजर गया।
पहले बताया गया था निजी वाहन का हादसा
शुरुआती पुलिस बयान में दावा किया गया था कि यह हादसा एक निजी टाटा सफारी कार (एपी 26 सीई 0001) से हुआ, जो वाईएसआरसीपी के आधिकारिक काफिले का हिस्सा नहीं थी। लेकिन चार दिन बाद सामने आए वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि हादसा एक काली कार से हुआ, जिसमें खुद जगन रेड्डी सवार थे। वीडियो में जगन को कार के दरवाजे से बाहर खड़े होकर समर्थकों का अभिवादन करते हुए देखा जा सकता है, वहीं कार उनके पैर के ठीक नीचे एक व्यक्ति को कुचलती नजर आ रही है।
सिंगय्या की हालत पर किसी ने नहीं दिया ध्यान
वीडियो में यह भी साफ दिखता है कि हादसे के बाद कार कुछ पलों के लिए रुकती है, लेकिन बाद में फिर से चल पड़ती है। उस वक्त कार पर गुलाब की पंखुड़ियां फेंकी जा रही थीं और कुछ समर्थक बोनट पर भी खड़े थे। सिंगय्या की गर्दन कुचलने के बाद भी कार के आसपास किसी ने तुरंत सहायता नहीं की।
गुंटूर के पुलिस अधीक्षक का बयान
गुंटूर के पुलिस अधीक्षक एस. सतीश कुमार ने मीडिया को बताया कि घायल सिंगय्या को मौके पर नजरअंदाज कर दिया गया और बाद में हाईवे पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात सहायक राजशेखर ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एसपी ने यह भी बताया कि अनुमति प्राप्त 14 वाहनों के मुकाबले बिना मंजूरी के करीब 35-38 अतिरिक्त वाहन काफिले में शामिल हो गए थे, जिससे हालात और बिगड़ गए।
प्रशासन और दल पर सवाल
यह हादसा न सिर्फ सुरक्षा इंतज़ामों की पोल खोलता है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करता है कि भीड़ प्रबंधन और काफिला नियंत्रण में कैसे चूक हुई। मृतक सिंगय्या एक पार्टी समर्थक के तौर पर रैली में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें न्याय और इंसाफ की राह में अपनी जान गंवानी पड़ी।