Hall of Fame : भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा पटल पर भारत का गौरव बढ़ाया है। अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान उन्हें पेंसिलवेनिया स्थित प्रतिष्ठित ‘यूएस आर्मी वॉर कॉलेज’ (USAWC) के ‘इंटरराष्ट्रीय हॉल ऑफ फेम’ में शामिल किया गया है। यह सम्मान उन अंतरराष्ट्रीय सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने इस संस्थान से शिक्षा प्राप्त की हो और बाद में अपने देश की सेना में सर्वोच्च पद तक पहुँचकर असाधारण नेतृत्व का परिचय दिया हो। जनरल द्विवेदी की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत सैन्य कुशलता को दर्शाती है, बल्कि यह विश्व स्तर पर भारतीय सेना की बढ़ती धाक और पेशेवर नेतृत्व कला का भी एक बड़ा प्रमाण है।
इस गौरव को पाने वाले तीसरे भारतीय: जनरल वी.के. सिंह और बिक्रम सिंह की श्रेणी में शामिल
जनरल उपेंद्र द्विवेदी इस विशिष्ट सम्मान को प्राप्त करने वाले भारतीय सेना के तीसरे प्रमुख बन गए हैं। उनसे पहले पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह और जनरल बिक्रम सिंह को भी यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के हॉल ऑफ फेम में जगह दी जा चुकी है। भारतीय सेना ने इस ऐतिहासिक क्षण को साझा करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। संस्थान के पूर्व छात्र (एलुमनाई) रहे जनरल द्विवेदी ने वहां की फैकल्टी और विभिन्न देशों से आए सैन्य अधिकारियों को संबोधित भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने उभरती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक सैन्य नेतृत्व की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
रक्षा कूटनीति की मजबूती: वॉशिंगटन में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने की मेजबानी
जनरल द्विवेदी के इस दौरे का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। वॉशिंगटन डीसी में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने ‘इंडिया हाउस’ में सेना प्रमुख के सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। भारतीय दूतावास के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के बीच लगातार प्रगाढ़ हो रहे उच्चस्तरीय सैन्य सहयोग का प्रतीक है। वर्तमान समय में रक्षा सहयोग भारत-अमेरिका वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है, जो न केवल द्विपक्षीय हितों बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हवाई में गार्ड ऑफ ऑनर: हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर गंभीर मंथन
इससे पहले सेना प्रमुख हवाई पहुंचे, जहां यूएस आर्मी पैसिफिक के मुख्यालय ‘फोर्ट शाफ्टर’ में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। वहां उन्होंने यूएस आर्मी पैसिफिक के कमांडर जनरल रोनाल्ड पी. क्लार्क के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और रणनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा की। इस मुलाकात का मुख्य केंद्र ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र’ (Indo-Pacific Region) रहा। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने एक मुक्त, खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया। यह चर्चा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सैन्य शिक्षा और भविष्य की तकनीक: शोध परियोजनाओं का गहन अवलोकन
अपनी यात्रा के दौरान जनरल द्विवेदी ने केवल रणनीतिक वार्ताओं तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने सैन्य शिक्षा और शोध के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर भी ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने आर्मी वॉर कॉलेज में चल रही आधुनिक शोध परियोजनाओं की समीक्षा की और विशेषज्ञों के साथ पैनल चर्चाओं में भाग लिया। यह दौरा सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में ज्ञान और तकनीक के आदान-प्रदान का एक बड़ा माध्यम बना। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरों से भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय (Interoperability) स्थापित करने में मदद मिलेगी।
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