Bhupinder Hooda AJL case : पंचकूला एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में भूपेंद्र हुड्डा को बड़ी राहत, सीबीआई अदालत ने किया आरोपमुक्त

हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए राहत की सबसे बड़ी खबर! पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने एजेएल प्लॉट आवंटन मामले में उन्हें पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सीबीआई और ईडी दोनों के मामले बंद हो गए। क्या यह हुड्डा की बड़ी राजनीतिक वापसी है?

Bhupinder Hooda AJL case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 3, 2026

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Bhupinder Hooda AJL case : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बहुत बड़ी जीत सामने आई है। पंचकूला स्थित सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने चर्चित एजेएल (Associated Journals Limited) प्लॉट आवंटन मामले में हुड्डा के खिलाफ लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने न केवल हुड्डा, बल्कि इस मामले में नामजद रहे कांग्रेस के दिवंगत दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा को भी मरणोपरांत आरोपमुक्त कर दिया है। इस फैसले ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोपों के केंद्र में था।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मिली क्लीन चिट

सीबीआई कोर्ट का यह निर्णय पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के उस महत्वपूर्ण रुख के बाद आया है, जिसमें पर्याप्त साक्ष्य न होने की बात कही गई थी। दरअसल, पूर्व में निचली अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के आदेश को भूपेंद्र सिंह हुड्डा और एजेएल प्रबंधन ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने अपनी विस्तृत सुनवाई में स्पष्ट किया था कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि नहीं करते। कोर्ट ने माना कि बिना किसी ठोस आधार के ट्रायल चलाना न्यायोचित नहीं है, जिसके बाद सीबीआई कोर्ट ने आज औपचारिक रूप से राहत प्रदान की।

क्या था पंचकूला प्लॉट आवंटन का विवाद?

यह पूरा विवाद पंचकूला के सेक्टर-6 में स्थित लगभग 3,360 वर्ग मीटर के एक बेशकीमती सरकारी भूखंड के आवंटन से जुड़ा था। सीबीआई का मुख्य आरोप यह था कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के तत्कालीन अध्यक्ष के रूप में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने पद का दुरुपयोग किया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह प्लॉट बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर एजेएल को आवंटित किया गया था, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि 64.93 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाले इस भूखंड को मात्र 69.39 लाख रुपये में एजेएल को सौंप दिया गया था।

लंबी कानूनी प्रक्रिया और जांच का घटनाक्रम

इस मामले में कानूनी कार्यवाही का सिलसिला 27 जनवरी 2017 को शुरू हुआ था, जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद करीब दो साल की जांच के बाद 1 दिसंबर 2018 को विशेष अदालत में चार्जशीट पेश की गई। चार्जशीट में हुड्डा के साथ-साथ एचएसवीपी के कुछ तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों को भी साजिश का हिस्सा बताया गया था। हालांकि, बचाव पक्ष ने शुरू से ही इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था और दलील दी थी कि आवंटन नियमों के दायरे में रहकर किया गया था।

न्यायपालिका पर हुड्डा का अटूट विश्वास

अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने हमेशा से यह कहा है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। मुझे भारत की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज के फैसले ने यह साबित कर दिया कि मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार थे।” हुड्डा के समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सच्चाई की जीत बताया है।

ग्रामीण और शहरी राजनीति पर फैसले का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से हरियाणा की राजनीति में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की स्थिति और मजबूत होगी। विशेष रूप से आगामी चुनावों और राजनीतिक रैलियों में कांग्रेस अब भाजपा सरकार पर “प्रतिशोध की राजनीति” करने का आरोप और प्रखरता से लगा सकेगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सीबीआई कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ‘पर्याप्त सबूतों का अभाव’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जो जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल, इस फैसले ने हुड्डा परिवार और कांग्रेस खेमे को एक बड़ी मानसिक और कानूनी राहत प्रदान की है।

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