Chandigarh Mayor Election: भाजपा का ‘क्लीन स्वीप’, सौरभ जोशी बने नए मेयर; धराशायी हुआ विपक्षी एकता का किला

चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2026 में भाजपा ने बाजी मार ली है। सौरभ जोशी 18 वोट पाकर मेयर बने, जबकि AAP और कांग्रेस के अलग-अलग लड़ने से उनकी हार तय हो गई। पहली बार 'शो ऑफ हैंड्स' (हाथ उठाकर) हुई वोटिंग ने क्या गेम बदला? जानें इस ऐतिहासिक जीत के पीछे की पूरी कहानी।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 29, 2026

Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ नगर निगम के बहुचर्चित मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए शानदार जीत दर्ज की है। भाजपा के दिग्गज नेता सौरभ जोशी चंडीगढ़ के नए मेयर चुने गए हैं। राजनीतिक गहमागहमी और कड़े सुरक्षा घेरे के बीच संपन्न हुए इस चुनाव में सौरभ जोशी ने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को भारी मतों के अंतर से शिकस्त दी। इस जीत के साथ ही शहर की सत्ता की चाबी एक बार फिर भगवा दल के पास आ गई है, जिसने न केवल मेयर बल्कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भी क्लीन स्वीप किया है।

त्रिकोणीय मुकाबले में बिखरा विपक्ष, सौरभ जोशी को मिले 18 वोट

मेयर पद के लिए हुए मतदान में कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन विपक्षी एकजुटता की कमी का सीधा फायदा भाजपा को हुआ। घोषित नतीजों के मुताबिक, भाजपा के सौरभ जोशी को कुल 18 पार्षदों का समर्थन मिला। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार योगेश ढींगरा महज 11 वोटों पर सिमट गए। कांग्रेस के प्रत्याशी गुरप्रीत सिंह गाबी को केवल 7 वोट प्राप्त हुए। हालांकि बहुमत का आंकड़ा 19 था, लेकिन त्रिकोणीय संघर्ष में सर्वाधिक वोट मिलने के आधार पर सौरभ जोशी को विजेता घोषित कर दिया गया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सदन में पहुँचकर अपनी पार्टी के पक्ष में मतदान किया, लेकिन वह कांग्रेस की हार को टालने में नाकाम रहे।

बैलेट पेपर के बजाय ‘हाथ उठाकर’ हुई ऐतिहासिक वोटिंग

इस बार का मेयर चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक और अलग रहा। साल 1996 के बाद पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम में बैलेट पेपर के बजाय ‘हाथ उठाकर’ और मौखिक घोषणा के जरिए मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई। पीठासीन अधिकारी रमणीक सिंह बेदी की देखरेख में हुई इस पारदर्शी वोटिंग प्रक्रिया के दौरान हर पार्षद ने वोट देने के बाद आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए। पिछली बार के चुनाव में हुए विवादों और धांधली के आरोपों को देखते हुए प्रशासन ने इस बार सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की थी, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों पर भी भाजपा का कब्जा

मेयर पद के साथ-साथ भाजपा ने अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी एकतरफा जीत हासिल की। जसमनप्रीत सिंह चंडीगढ़ के नए सीनियर डिप्टी मेयर चुने गए हैं, उन्होंने आप के मुनव्वर खान को 18-11 के अंतर से हराया। इसी तरह, डिप्टी मेयर पद पर भाजपा की सुमन शर्मा ने जीत दर्ज की, जिन्हें 18 वोट मिले जबकि आप की जसविंदर कौर को 11 वोटों से संतोष करना पड़ा। गौर करने वाली बात यह रही कि कांग्रेस ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में हिस्सा ही नहीं लिया, जिससे भाजपा की राह और आसान हो गई।

‘आप’ का कांग्रेस पर प्रहार: “भाजपा को पहुँचाया सीधा फायदा”

चुनाव परिणामों के बाद चंडीगढ़ की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी के चंडीगढ़ प्रभारी जरनैल सिंह ने ट्वीट कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से बाहर रहकर और मेयर चुनाव में अलग लड़कर परोक्ष रूप से भाजपा की मदद की है। जरनैल सिंह के अनुसार, कांग्रेस की इस रणनीति ने एक बार फिर भाजपा के लिए जीत का रास्ता साफ कर दिया। इस तल्खी ने भविष्य में ‘इंडिया गठबंधन’ के स्थानीय समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

नई टीम के सामने शहर की विकास चुनौतियां

सौरभ जोशी के नेतृत्व में भाजपा की इस नई टीम के सामने चंडीगढ़ के विकास और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। जीत के बाद जोशी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता शहर की सफाई व्यवस्था, पार्किंग की समस्या और जनहित के कार्यों को बिना किसी भेदभाव के पूरा करना है। शहर की जनता अब यह उम्मीद कर रही है कि चुनाव के शोर के बाद अब नगर निगम सुचारू रूप से कार्य करेगा।

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