UP News: चंद्रशेखर आजाद हाउस अरेस्ट! ‘सत्ता परिवर्तन यात्रा’ से पहले पुलिस ने घेरा घर, समर्थकों में भारी आक्रोश

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। वे अपनी 'सत्ता परिवर्तन यात्रा' शुरू करने वाले थे, लेकिन प्रशासन ने अनुमति न होने और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर उन्हें घर में ही रोक दिया है। इस कार्रवाई से पश्चिमी यूपी की राजनीति गरमा गई है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 4, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। पश्चिमी यूपी में मजबूत आधार रखने वाले आजाद समाज पार्टी (एएसपी) के प्रमुख और नगीना से सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद को आज यानी 4 जून को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। चंद्रशेखर अपनी महत्वाकांक्षी ‘सत्ता परिवर्तन यात्रा’ शुरू करने वाले थे, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने कानून-व्यवस्था (Law and Order) का हवाला देते हुए उन्हें बिजनौर के धामपुर स्थित उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया। प्रशासन के इस सख्त रुख ने सूबे की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का दिया हवाला

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद की पार्टी को इस यात्रा के आयोजन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद एएसपी कार्यकर्ता और समर्थक बड़े स्तर पर रैली की तैयारियों में जुटे थे। सोशल मीडिया के माध्यम से भारी जनसमूह को जुटाने की अपील की जा रही थी, जिसने जिला प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी थीं। सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए, पुलिस ने यात्रा शुरू होने से ठीक पहले चंद्रशेखर को उनके आवास पर रोक दिया। उनके घर के बाहर चार थानों की पुलिस फोर्स और कई वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है।

सत्ता परिवर्तन का बड़ा सियासी संकल्प

चंद्रशेखर आजाद ने अपनी इस यात्रा को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों पर आधारित बताया था। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य बहुजन समाज, पिछड़े वर्गों, आदिवासियों, किसानों, युवाओं और महिलाओं को एक मंच पर लाकर सत्ता परिवर्तन का आह्वान करना था। चंद्रशेखर की पार्टी ने इस यात्रा के लिए 32 सूत्रीय एजेंडा तैयार किया था। इसमें प्रमुख रूप से पेपर लीक को जघन्य अपराध घोषित करने, कक्षा 1 से 12 तक निःशुल्क शिक्षा, पदोन्नति में आरक्षण और अति पिछड़ी जातियों के लिए 15 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण की मांग शामिल थी।

सरकार बनाम विपक्ष का राजनीतिक टकराव

इस घटनाक्रम के पीछे का एक बड़ा राजनीतिक कारण डॉ. आंबेडकर के अस्थिकलश का मुद्दा भी बताया जा रहा है। एएसपी ने आरोप लगाया है कि सरकार अस्थिकलश को दूसरे स्थान पर ले जाने की योजना बना रही है, जिसका पार्टी पुरजोर विरोध करने वाली थी। अपनी यात्रा के एजेंडे और सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार करने के चलते प्रशासन का रुख और अधिक सख्त हो गया। विपक्षी दल इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष और जिला प्रशासन इसे शांति व्यवस्था बनाए रखने की मजबूरी करार दे रहा है।

आगे की रणनीति पर सबकी नजरें

चंद्रशेखर का हाउस अरेस्ट होना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बड़े राजनीतिक विरोध का संकेत है। एएसपी प्रमुख द्वारा चुनाव से पहले ताकत दिखाने के इस प्रयास को प्रशासन ने भले ही रोक दिया हो, लेकिन यह स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनाव में दलित और पिछड़ा वर्ग वोट बैंक के लिए संघर्ष और तेज होगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि चंद्रशेखर आजाद इस नजरबंदी के बाद क्या कदम उठाते हैं और क्या वे आने वाले दिनों में अपनी सत्ता परिवर्तन रैली (Political Rally) को फिर से शुरू करने का प्रयास करेंगे।