Civil Services Day: हर साल 21 अप्रैल को मनाया जाने वाला सिविल सेवा दिवस (Civil Services Day) भारत के प्रशासनिक ढांचे के उन स्तंभों को समर्पित है, जो पर्दे के पीछे रहकर देश की प्रगति की पटकथा लिखते हैं। इस वर्ष भी इस गौरवशाली अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व—राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी—ने सिविल सेवकों के अटूट समर्पण, ईमानदारी और सुशासन की दिशा में उनके प्रयासों की सराहना की है।
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राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने बधाई संदेश में सिविल सेवकों को सुशासन और संस्थानों के सशक्तिकरण की रीढ़ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों का कार्य केवल कागजी नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नीतियों के निर्माण से लेकर उनके प्रभावी क्रियान्वयन तक, उनका हर कदम करोड़ों भारतीयों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
राष्ट्रपति ने उभरते भारत की आकांक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य और नागरिकों के बीच के विश्वास को बनाए रखने में सिविल सेवकों की ईमानदारी और सहानुभूति (Empathy) सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से सार्वजनिक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और एक न्यायसंगत समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सेवकों को राष्ट्र निर्माण की एक ‘मजबूत कड़ी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर (Ground Level) पर योजनाओं को लागू करने से लेकर दिल्ली में बैठकर नीति निर्धारण करने तक, इन अधिकारियों का योगदान भारत के विकास की गति को ऊर्जा देता है।
प्रधानमंत्री ने इस दिन को एक संकल्प दिवस के रूप में देखने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे उत्कृष्टता, करुणा और नवाचार (Innovation) के साथ जनता की सेवा करते रहें, ताकि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ पहुँच सके।
केंद्रीय मंत्रियों ने सराहा अटूट समर्पण
अमित शाह (गृह मंत्री): उन्होंने लोक सेवकों के समर्पण को नमन करते हुए कहा कि नीतियों के वास्तविक क्रियान्वयन और शासन की मजबूती में उनका योगदान अतुलनीय है।
नितिन गडकरी (सड़क परिवहन मंत्री): उन्होंने सिविल सेवकों की मेहनत को जनकल्याण के विश्वास की आधारशिला बताया और उनके समर्पण की सराहना की।
क्यों मनाया जाता है सिविल सेवा दिवस?
इस दिन का भारत के इतिहास में विशेष महत्व है। 21 अप्रैल 1947 को देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली के मेटकाफ हाउस में स्वतंत्र भारत के पहले बैच के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया था। इसी ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने सिविल सेवकों को ‘भारत का स्टील फ्रेम’ (Steel Frame of India) कहा था। उनकी इसी दूरदृष्टि को सम्मान देने के लिए 2006 से हर साल यह दिवस मनाया जाता है।
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