Congress Org Overhaul: कांग्रेस का बड़ा एक्शन, सभी सचिवों से मांगा पिछले छह महीनों का रिपोर्ट कार्ड

Congress Organization Internal Crisis Update: आगामी चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी के सभी 62 सचिवों और 8 संयुक्त सचिवों से पिछले छह महीनों के कामकाज का पूरा ब्योरा मांगकर हड़कंप मचा दिया है, आखिर इस कड़े परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद किन बड़े चेहरों पर गिरने वाली है गाज?

Congress Org Overhaul

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 7, 2026

Congress Org Overhaul: आगामी विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी जमीनी स्तर पर खुद को मजबूत करने की कवायद में पूरी तरह जुट गई है। देश के विभिन्न राज्यों में बढ़ती राजनीतिक सरगर्मियों के बीच कांग्रेस हाईकमान ने अपने पूरे संगठनात्मक ढांचे की व्यापक समीक्षा करने का एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पार्टी नेतृत्व ने संगठन में तैनात सभी सचिवों और संयुक्त सचिवों को कड़ा निर्देश जारी करते हुए उनसे पिछले छह महीनों के कामकाज का पूरा और विस्तृत ब्यौरा पेश करने को कहा है। इस कदम से पार्टी के भीतर हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसे सीधे तौर पर नेताओं की कार्यक्षमता और उनकी जवाबदेही तय करने से जोड़कर देखा जा रहा है।

राज्यों के सह-प्रभारियों को मिले कड़े निर्देश

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राज्यों के सभी सह-प्रभारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने आवंटित राज्यों में संगठन को मजबूत और गतिशील बनाने के लिए किए गए सभी कार्यों की एक विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपें। इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से पार्टी आलाकमान यह सटीक आकलन करना चाहता है कि संगठन में नियुक्त किए गए पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में कितने सक्रिय हैं। इसके साथ ही, नेतृत्व यह भी जानना चाहता है कि इन पदाधिकारियों ने जमीनी स्तर पर आम जनता के बीच पार्टी की पकड़ को मजबूत करने के लिए अब तक क्या वास्तविक और ठोस योगदान दिया है।

संयुक्त सचिवों में मची खलबली, रिपोर्ट तैयार

कांग्रेस आलाकमान की ओर से आए इस अचानक और सख्त निर्देश के बाद पार्टी के सभी सचिव और संयुक्त सचिव अपने-अपने कार्यों का पूरा लेखा-जोखा और रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में पूरी ताकत से जुट गए हैं। पार्टी द्वारा उनसे बेहद बारीकी से यह जानकारी मांगी गई है कि बीते छह महीनों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कुल कितने राज्यों का दौरा किया, जमीनी स्तर पर सरकार के खिलाफ आयोजित कितने आंदोलनों, जन-जागरूकता अभियानों और विरोध प्रदर्शनों में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। इसके अलावा, एक सह-प्रभारी के तौर पर राज्यों में उनकी भूमिका कितनी प्रभावी और परिणामोन्मुखी रही है, इसका पूरा विवरण भी इस रिपोर्ट का मुख्य हिस्सा होगा।

जनसंपर्क अभियान का मांगा गया ब्यौरा

पार्टी नेतृत्व ने अपने पदाधिकारियों से केवल दौरों की संख्या ही नहीं पूछी है, बल्कि कुछ बेहद गंभीर और नीतिगत सवाल भी किए हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि प्रदेश संगठन से लेकर बिल्कुल जमीनी यानी बूथ स्तर तक कांग्रेस की मूल विचारधारा को आम लोगों के बीच मजबूत करने और सुप्त पड़े कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय व ऊर्जावान बनाने के लिए उन्होंने क्या विशेष प्रयास किए हैं। इसके अतिरिक्त, पिछले छह महीनों में चलाए गए संगठन विस्तार के कार्यक्रमों, नए सदस्यों को जोड़ने के लिए सदस्यता अभियानों, कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविरों और व्यापक जनसंपर्क गतिविधियों को भी इस रिपोर्ट में अनिवार्य रूप से शामिल करने का आदेश दिया गया है।

रिपोर्ट के आधार पर ही तय होंगी भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियां

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि पदाधिकारियों द्वारा सौंपी जाने वाली इन गोपनीय और विस्तृत रिपोर्टों के गहन अध्ययन के आधार पर ही भविष्य में नई संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा। जो नेता अपने क्षेत्र में सक्रिय और प्रभावी प्रदर्शन करने में सफल साबित होंगे, उन्हें संगठन में प्रमोट किया जा सकता है और नई तथा बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। इसके विपरीत, जो पदाधिकारी अपने कर्तव्यों में निष्क्रिय पाए जाएंगे या जिनकी रिपोर्ट असंतोषजनक होगी, उनकी भूमिका पर आलाकमान कड़ा फैसला ले सकता है और उन्हें पदमुक्त भी किया जा सकता है।

70 शीर्ष पदाधिकारियों की समीक्षा 

मौजूदा समय में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के संगठनात्मक ढांचे में कुल 62 सचिव और 8 संयुक्त सचिव सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में कुल 70 शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ चलाया जा रहा यह व्यापक समीक्षा अभियान केवल कागजी रिपोर्ट जुटाने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पार्टी के भीतर एक बहुत बड़े और व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन की ठोस शुरुआत है, जिसके जरिए पार्टी में ‘काम नहीं तो पद नहीं’ की नीति के तहत कड़ी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।

मिशन 2029 को लेकर बेहद गंभीर हुई कांग्रेस

आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों और विशेष रूप से वर्ष 2029 के आम चुनावों की रणनीतिक तैयारियों के मद्देनजर कांग्रेस नेतृत्व अब संगठन के स्तर पर किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है। यही सबसे बड़ी वजह है कि कांग्रेस हाईकमान अब उन नेताओं के बीच एक बहुत ही स्पष्ट और पारदर्शी अंतर पैदा करना चाहता है जो वास्तव में जमीनी स्तर पर पसीना बहा रहे हैं, और उन नेताओं के बीच जो केवल बड़े पद संभालकर मलाई काट रहे हैं। पार्टी का पूरा ध्यान अब केवल परिणाम देने वाले नेताओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हो चुका है।

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