Congress: कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को आरएसएस के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सवाल उठाया कि पीएम आरएसएस की तारीफ किस बात की कर रहे है. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सिर्फ एक सिक्का जारी कर संघ की प्रशंसा नहीं की जा सकती.उनका कहना था कि आरएसएस एक ऐसा संगठन है, जिसके हाथ महात्मा गांधी के खून से रंगे हैं और जिसे देश के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल ने प्रतिबंधित किया था.
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कांग्रेस ने पुराने दस्तावेजों का दिया हवाला
आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर कांग्रेस ने पुराने दस्तावेजों और किताबों का हवाला देते हुए दावा किया कि महात्मा गांधी ने आरएसएस को ‘तानाशाही सोच वाला सांप्रदायिक संगठन’ बताया था. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि यह जानकारी गांधीजी की जीवनी में दर्ज है, जिसे उनके करीबी सहयोगी प्यारे लाल ने लिखा था.
प्यारे लाल की पुस्तक में दर्ज विवरण

इसी कड़ी में आगे जयराम रमेश ने बताया कि प्यारे लाल की पुस्तक ‘महात्मा गांधी: द लास्ट फेज’ का पहला खंड 1956 में प्रकाशित हुआ, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अनुशंसा शामिल थी. दूसरा खंड 1958 में आया। इस पुस्तक के पेज नंबर 440 पर 12 सितंबर 1947 की एक बातचीत में गांधीजी ने आरएसएस को ‘सांप्रदायिक संगठन जिसकी सोच तानाशाही है’ बताया.
प्यारेलाल महात्मा गांधी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक थे। वे लगभग तीन दशकों तक गांधीजी के निजी स्टाफ़ का हिस्सा रहे। 1942 में महादेव देसाई की मृत्यु के बाद वे महात्मा गांधी के सचिव बने।
महात्मा गांधी पर प्यारेलाल की किताबें आज मानक संदर्भ ग्रंथ मानी जाती हैं। 1956 में… pic.twitter.com/XAPJ7KIE9n
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 2, 2025
सरदार पटेल का आरएसएस पर प्रतिबंध
जयराम रमेश ने कहा कि गांधीजी की इस बातचीत के पांच महीने बाद तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था. जयराम रमेश ने उस समय की चिट्ठियों और दस्तावेजों का भी हवाला देते हुए बताया कि सरदार पटेल ने आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों को गांधीजी की हत्या जैसी त्रासदी का जिम्मेदार माहौल बनाने वाला बताया था.
PM मोदी के भाषण पर कांग्रेस का पलटवार

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को आरएसएस की शताब्दी समारोह में कहा कि संगठन पर हमले जरूर हुए, लेकिन संघ ने कभी कड़वाहट नहीं दिखाई और हमेशा ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर काम किया. इसके जवाब में कांग्रेस ने उन्हें गांधीजी की हत्या और उस समय के ऐतिहासिक तथ्यों की याद दिलाई।
जयराम रमेश का सोशल मीडिया बयान
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों ने देश और सरकार के लिए खतरे का माहौल बनाया. उन्होंने यह भी कहा कि सरदार पटेल ने 19 दिसंबर 1948 को जयपुर में आयोजित जनसभा में भी आरएसएस पर तीखी टिप्पणियां की थी.
आरएसएस की शताब्दी पर प्रधानमंत्री की तारीफ और कांग्रेस का ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पलटवार, राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है.
