सेक्टर 58-115 की कनेक्टिविटी सुधरेगी, सरकार ने उठाया बड़ा कदम

गुरुग्राम गुरुग्राम में सेक्टर 58 से 115 तक विकसित हो रहे लाखों घर खरीदारों और निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। नगर योजनाकर विभाग ने इन इलाकों में कनेक्टिविटी की सबसे बड़ी बाधा को दूर करने के लिए लगभग 1150 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की सिफारिश की है। यह जमीन सेक्टर के बीच 24 मीटर चौड़ी छूटी हुई अंदरूनी सड़कों के निर्माण के लिए अधिग्रहित की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने प्राथमिकता के आधार पर राज्य सरकार को इसका अंतिम प्रस्ताव भेजने के निर्देश जारी कर दिए हैं। आलीशान

Wrriten By :

Editor

Published On :

जुलाई 13, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

गुरुग्राम
गुरुग्राम में सेक्टर 58 से 115 तक विकसित हो रहे लाखों घर खरीदारों और निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। नगर योजनाकर विभाग ने इन इलाकों में कनेक्टिविटी की सबसे बड़ी बाधा को दूर करने के लिए लगभग 1150 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की सिफारिश की है।

यह जमीन सेक्टर के बीच 24 मीटर चौड़ी छूटी हुई अंदरूनी सड़कों के निर्माण के लिए अधिग्रहित की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने प्राथमिकता के आधार पर राज्य सरकार को इसका अंतिम प्रस्ताव भेजने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

आलीशान सोसाइटी वाले भी संकरी ग्रामीण सड़कों पर निर्भर
नए सेक्टर में बुनियादी सड़कों की कमी शहर के विकास और निवासियों के लिए एक नासूर बन चुकी है। कई आलीशान सोसाइटियों और निजी कॉन्डोमिनियम के निवासियों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए आज भी संकरी ग्रामीण सड़कों पर निर्भर रहना पड़ता है। जनता की इसी परेशानी को देखते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस साल के बजट भाषण में घोषणा की थी कि इन छूटी हुई कड़ियों को जोड़ने के लिए सरकार खुद जमीन अधिग्रहित करेगी। 21 मई को बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक के दौरान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने इन सड़कों के साथ लगती कमर्शियल जमीन के टुकड़ों को भी अधिग्रहित करने की रणनीति बनाई है।

मास्टर प्लान की गड़बड़ी और नीतिगत विफलता
इस समस्या की जड़ें शहर के मास्टर प्लान में हुए बदलावों से जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री ने बजट सत्र के दौरान स्पष्ट किया था कि मास्टर प्लान 2001 इस योजना के तहत सड़कों के निर्माण की ज़िम्मेदारी एचएसवीपी की थी, इसलिए तब ऐसी कोई समस्या नहीं आई। गुरुग्राम-मानेसर मास्टर प्लान 2031 के तहत 24-मीटर चौड़ी अंदरूनी सड़कों को बनाने की ज़िम्मेदारी निजी डेवलपर्स पर डाल दी गई।

हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
सड़कों के न होने से परेशान नए सेक्टर्स के निवासियों ने पिछले साल अक्तूबर में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाया था। अदालत में याचिका दायर करने वाले द्वारका ई-वे गुरुग्राम डेवलपमेंट एसोसिएशन के डिप्टी कन्वीनर सुनील सरीन ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा नए गुरुग्राम के आधे हिस्से के विकास के लिए इन अंदरूनी सड़कों का बनना जीवन रेखा की तरह है। सड़कों के अभाव में न केवल यातायात बाधित है, बल्कि पानी, सीवर और बिजली जैसी बुनियादी यूटिलिटी लाइनें भी नहीं बिछाई जा पा रही हैं। कई बिल्डरों को नए प्रोजेक्ट का लाइसेंस भी नहीं मिल पा रहा है। सरकार को अब बिना वक्त गंवाए इस अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करना चाहिए।

2