आतंकियों की जमानत पर गरमाई बहस, सरकार ने SC में कसाब और हाफिज सईद का किया जिक्र

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों आतंकवाद निरोधी कानून 'UAPA' के तहत जमानत के नियमों को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक बेहद कड़ा सवाल उठाया है- 'क्या ट्रायल में देरी के आधार पर अजमल कसाब या हाफिज सईद जैसे खूंखार आतंकियों को भी जमानत दी जा सकती है?' इस मामले का सीधा असर भारत की न्याय प्रणाली और जेलों में बंद उन सैकड़ों विचाराधीन कैदियों पर पड़ेगा, जो सालों से UAPA के तहत बिना सजा के जेल काट रहे हैं। यह बहस राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक नई

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Published On :

मई 24, 2026

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों आतंकवाद निरोधी कानून 'UAPA' के तहत जमानत के नियमों को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक बेहद कड़ा सवाल उठाया है- 'क्या ट्रायल में देरी के आधार पर अजमल कसाब या हाफिज सईद जैसे खूंखार आतंकियों को भी जमानत दी जा सकती है?' इस मामले का सीधा असर भारत की न्याय प्रणाली और जेलों में बंद उन सैकड़ों विचाराधीन कैदियों पर पड़ेगा, जो सालों से UAPA के तहत बिना सजा के जेल काट रहे हैं। यह बहस राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच एक नई लकीर खींचेगी।

क्या है पूरा मामला और केंद्र की दलील?
सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग बेंचों ने UAPA आरोपियों की जमानत को लेकर विपरीत राय दी है। हाल ही में एक बेंच ने कहा था कि मुकदमे (Trial) में लंबी देरी होने पर आरोपियों को जमानत मिलनी चाहिए। इसी निष्कर्ष पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट में कड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि ट्रायल में देरी के आधार पर सभी को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

"अजमल कसाब के मामले में बड़ी संख्या में गवाह थे, जिससे ट्रायल में देरी हुई। तो क्या आप उसे सिर्फ देरी के आधार पर जमानत दे देंगे? अगर हाफिज सईद को पाकिस्तान से लाया जाए और सबूत जुटाने के कारण ट्रायल में 5 साल लग जाएं, तो क्या उसे भी जमानत मिल जाएगी?" – एसवी राजू, ASG (सुप्रीम कोर्ट में)
अपराध की गंभीरता और भूमिका है अहम

ASG राजू ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने स्पष्ट किया कि जमानत देते समय अपराध की गंभीरता और उसमें आरोपी की भूमिका को जरूर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगा मामले का उदाहरण दिया। कोर्ट ने इस मामले में 5 आरोपियों को जमानत दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे आरोपियों को उनकी गंभीर भूमिका के चलते राहत नहीं दी थी। इसे महज एक गणितीय फॉर्मूले की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की दो बेंचों में मतभेद
UAPA के तहत जमानत के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ही दो बेंचों के फैसले आपस में टकरा रहे हैं। इसी वजह से यह विवाद इतना गहरा गया है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई टेबल देखें:

बेंच (जज)मामलामुख्य टिप्पणी
जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयांसैयद इफ्तिखार अंद्राबी केस (मई 2026)ट्रायल में लंबी देरी और जेल में लंबा समय बिताना जमानत का मजबूत आधार है। 'जेल अपवाद है, बेल नियम है' का सिद्धांत यहां भी लागू होता है।
जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वरालेदिल्ली दंगा केस / उमर खालिद (जनवरी 2026)केवल लंबी कैद को जमानत का 'गणितीय फॉर्मूला' नहीं बनाया जा सकता। आरोपी की भूमिका और अपराध की गंभीरता देखना अनिवार्य है।

अब 'बड़ी बेंच' करेगी इस विवाद का फैसला 

इस मतभेद को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच ने 22 मई 2026 को इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की एक 'बड़ी बेंच' के पास भेज दिया है।

अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) इस कानूनी सवाल के लिए एक नई बेंच का गठन करेंगे। हालांकि, इस बीच कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के दो अन्य आरोपियों (तस्लीम अहमद और खालिद सैफी) को मामले के निपटारे तक 6 महीने की अंतरिम जमानत दे दी है। 

UAPA मामलों की टाइमलाइन

इस कानूनी विवाद की जड़ें पिछले कुछ सालों के बड़े फैसलों से जुड़ी हैं।

2021 (केए नजीब केस): सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला दिया था। इसमें माना गया कि अगर ट्रायल में बहुत ज्यादा देरी हो रही है, तो मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21) के तहत UAPA में भी जमानत दी जा सकती है।

जनवरी 2026: दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका इसी आधार पर खारिज हुई कि उनका अपराध गंभीर था और केवल समय बीतने पर जमानत नहीं मिल सकती।

मई 2026 (अंद्राबी केस): दूसरी बेंच ने कहा कि ट्रायल में देरी होने पर जमानत मिलनी ही चाहिए, जिससे यह मौजूदा विरोधाभास पैदा हुआ।

22 मई 2026: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के इस अहम मामले को अंतिम और स्पष्ट फैसले के लिए 'लार्जर बेंच' के पास रेफर कर दिया।

 

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