Delhi High Court News: दोस्ती और सहमति पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार!

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी वसीम अख्तर की जमानत याचिका को कड़े रुख के साथ खारिज कर दिया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 22, 2026

Delhi High Court News: दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने आरोपी को नियमित जमानत देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि वैलेंटाइन डे पर दोस्ती होने का मतलब यह नहीं कि संबंध बनाने का अधिकार मिल गया।

इंसाफ की मांग पर अड़ा परिवार: अमृतसर में गिरफ्तारी से पहले पोस्टमार्टम नहीं होगा

कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस गिरीश कथपालिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि लड़की नाबालिग है और उसकी सहमति के बिना संबंध बनाना अपराध है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोस्ती या वैलेंटाइन डे पर रोमांटिक पहलू होने का संकेत यह नहीं देता कि आरोपी को लड़की से शारीरिक संबंध बनाने का लाइसेंस मिल गया।

आरोपी की दलील और कोर्ट का जवाब

आरोपी के वकील ने दलील दी कि पीड़िता की उम्र 18 साल से अधिक है और उसने मर्जी से संबंध बनाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह दलील निराधार है। लड़की की सहमति के बिना उसकी मांग में सिंदूर भरना और जबरन शादी का दावा करना कानूनन गलत है। अदालत ने कहा कि कानून में मांग भरना अपराध न माना गया हो, लेकिन इसे जबरन करने से संबंध बनाने का अधिकार नहीं मिल जाता।

घटना का विवरण

पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी उम्र 17 साल है और वह आरोपी को एक साल से जानती थी। 14 फरवरी 2025 को आरोपी ने उसे बहाने से घर बुलाया। वहां उसने जबरन उसकी मांग में सिंदूर भर दिया और शादी का दावा करते हुए संबंध बनाने की कोशिश की। विरोध करने पर भी उसने जबरदस्ती संबंध बनाए। इसके बाद लड़की ने घर आकर अपने भाई को बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

कोर्ट का स्पष्ट संदेश

हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी लड़की की सहमति के बिना संबंध बनाना अपराध है। दोस्ती या वैलेंटाइन डे पर साथ समय बिताना किसी को यह अधिकार नहीं देता कि वह लड़की पर जबरन शादी या संबंध थोपे। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि इस तरह के मामलों में कानून सख्ती से लागू होगा।

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल आरोपी की जमानत याचिका पर रोक लगाता है बल्कि समाज को भी स्पष्ट संदेश देता है कि दोस्ती या रोमांटिक संबंध का मतलब सहमति नहीं होता। नाबालिग लड़की के साथ जबरन संबंध बनाना गंभीर अपराध है और कानून इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करता। यह फैसला युवाओं और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि रिश्तों में सहमति और सम्मान सबसे अहम है।

स्टील घोटाले पर बड़ा एक्शन: CBI ने महारत्न कंपनी SAIL पर कसा शिकंजा