Bullet Train Delhi to Siliguri: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश को एक बड़ी सौगात देते हुए ‘दिल्ली-सिलीगुड़ी हाईस्पीड कॉरिडोर’ की घोषणा की है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी रेल परियोजना होगी। यह कॉरिडोर उत्तर भारत को पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार (चिकन नेक) से जोड़ेगा। इस हाईस्पीड प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली से सिलीगुड़ी तक की लगभग 1500 किलोमीटर की दूरी, जो वर्तमान में राजधानी या दुरंतो जैसी ट्रेनों से तय करने में 18 से 20 घंटे का समय लेती है, वह सिमटकर मात्र 6-7 घंटे की रह जाएगी।
यूपी, बिहार और बंगाल को जोड़ेगी नई रेल लाइन
बताते चले कि, यह बुलेट ट्रेन परियोजना दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों को एक सूत्र में पिरोएगी। योजना के अनुसार, इस कॉरिडोर को दो हिस्सों में विभाजित किया जाएगा—पहला दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर और दूसरा वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर। इसके प्रमुख स्टेशनों में नई दिल्ली, नोएडा (जेवर एयरपोर्ट), मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर, पटना और सिलीगुड़ी (न्यू जलपाईगुड़ी के करीब) शामिल होंगे। भविष्य में इस नेटवर्क को असम के गुवाहाटी तक विस्तार देने की भी संभावना है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कनेक्टिविटी और आसान हो जाएगी।
पर्यटन के साथ सुगम होगी लॉजिस्टिक्स
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, यह बुलेट ट्रेन 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती नजर आएगी। इसके परिचालन से दिल्ली से वाराणसी का सफर करीब 3 घंटे 50 मिनट और दिल्ली से पटना का सफर महज 4 घंटे 20 मिनट में तय हो सकेगा। सामरिक दृष्टिकोण से भी यह प्रोजेक्ट बेहद अहम है, क्योंकि सिलीगुड़ी को ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के मुख्य हिस्से से जोड़ता है। इस हाईस्पीड रेल सेवा से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सेना और रसद की आवाजाही में भी अभूतपूर्व तेजी आएगी।
पश्चिम बंगाल में रेल परियोजनाओं की नई रफ्तार
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में रेल अवसंरचना पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी। परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए रेल मंत्री और बंगाल के अधिकारियों ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, रेल मंत्री ने कोलकाता मेट्रो के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया, जिसके तहत 60 नेक्स्ट जेनरेशन ट्रेनें चलाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि अब बंगाल को रेलवे बजट के रूप में 14,205 करोड़ रुपये आवंटित किए जा रहे हैं, जो पिछली सरकारों के मुकाबले काफी अधिक है, जिससे अटकी हुई 100 से अधिक रेल परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।










