Dr Gopalrao Patil Death: नहीं रहे BJP के दिग्गज राज्यसभा सदस्य, 94 वर्ष की उम्र में निधन

डॉ गोपालराव पाटिल का निधन केवल एक राजनीतिक खबर नहीं बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व की कहानी का अंत है जिसने डॉक्टर से नेता तक का सफर तय किया, जानिए उनके जीवन, संघर्ष, उपलब्धियों और उस कारण को जिसने उनके निधन को पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 22, 2026

Dr Gopalrao Patil Death: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अनुभवी नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. गोपालराव पाटिल का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वे 94 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। लातूर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई है।

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लातूर में हुआ अंतिम संस्कार

डॉ. पाटिल का अंतिम संस्कार उसी दिन शाम 5 बजे लातूर में स्थित संत तुकाराम नेशनल मॉडल स्कूल के मैदान में किया गया। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, राजनीतिक कार्यकर्ता और उनके समर्थक उपस्थित रहे। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।

परिवार और निजी जीवन

डॉ. पाटिल अपने पीछे एक सुसंस्कृत और शिक्षित परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी शांताबाई पाटिल, एक पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। उनके बेटे सच्चिदानंद विदेश में आईटी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, जबकि उनकी बेटियां विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में कार्यरत हैं। परिवार के सभी सदस्य समाज में अपनी अलग पहचान रखते हैं।

साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण सफर

डॉ. पाटिल का जन्म 3 अक्टूबर 1931 को महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के उमरगा तालुका के कवठा गांव में हुआ था। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की और एमबीबीएस तथा डीसीएच की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने लातूर में एक बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में लंबे समय तक सेवा दी और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण व्यापक सम्मान अर्जित किया।

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शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में योगदान

चिकित्सा क्षेत्र के अलावा, डॉ. पाटिल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे शिव छत्रपति शिक्षण संस्था के अध्यक्ष रहे और उन्होंने इंडियन पीडियाट्रिक एसोसिएशन की एक स्थानीय शाखा की स्थापना में अहम योगदान दिया। वे इस संस्था के पहले अध्यक्ष भी बने। उन्होंने देशभर में आयोजित कई चिकित्सा सम्मेलनों में भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।

राजनीतिक जीवन और उपलब्धियां

डॉ. पाटिल ने 1994 से 2000 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने वाणिज्य, विदेश मामलों और रेलवे जैसी महत्वपूर्ण संसदीय समितियों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने लोकसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल चाकुरकर के खिलाफ भी चुनाव लड़ा था। वर्ष 1998 में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर सांसद’ के सम्मान से नवाजा गया, जो उनके बहुआयामी योगदान का प्रमाण है।

विविध रुचियों के धनी व्यक्तित्व

डॉ. पाटिल केवल एक राजनेता या चिकित्सक ही नहीं, बल्कि एक विद्वान व्यक्तित्व भी थे। उन्हें पढ़ने, यात्रा करने और ग़ज़लों में विशेष रुचि थी। वे मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत और फ्रेंच जैसी कई भाषाओं के जानकार थे, जो उनकी बौद्धिक गहराई को दर्शाता है।

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एक युग का अंत

डॉ. गोपालराव पाटिल का निधन एक ऐसे व्यक्तित्व की विदाई है, जिन्होंने चिकित्सा, शिक्षा और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।