FIFA Controversy: इन्फेंटीनो के खिलाफ बढ़ा विरोध, La Liga प्रमुख ने खोला मोर्चा

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटीनो के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। ला लीगा प्रमुख ने भी फुटबॉल प्रशासन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इस विवाद ने वैश्विक फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है। आखिर इन्फेंटीनो पर सवाल क्यों उठ रहे हैं और इसका असर क्या होगा, जानिए पूरी रिपोर्ट।

FIFA Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 22, 2026

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FIFA Controversy:  स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लीगा के अध्यक्ष जेवियर टेबास ने फीफा (FIFA) के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अब उनके पद छोड़ने का समय आ चुका है। टेबास का मानना है कि इन्फेंटिनो का कार्यकाल पर्याप्त लंबा हो चुका है और फीफा को नई नेतृत्व व्यवस्था की जरूरत है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा परिस्थितियों में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना बेहद कम दिखाई देती है, क्योंकि फीफा की चुनावी प्रणाली किसी भी नए उम्मीदवार के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

नेतृत्व परिवर्तन की संभावना पर जताया संदेह

जेवियर टेबास ने कहा कि फीफा के मौजूदा ढांचे में ऐसा माहौल नहीं है, जहां कोई आसानी से मौजूदा अध्यक्ष को चुनौती दे सके। उनके अनुसार, संगठन की चुनाव प्रक्रिया इस तरह बनी हुई है कि संभावित उम्मीदवार चुनाव लड़ने से पहले ही पीछे हट जाते हैं। टेबास का कहना है कि हार की आशंका के कारण कोई भी मजबूत विपक्षी उम्मीदवार सामने आने को तैयार नहीं होता, जिससे नेतृत्व में बदलाव की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं।

इन्फेंटिनो के फैसलों से असहमति, लेकिन खुलकर विरोध नहीं

टेबास ने दावा किया कि फुटबॉल जगत के कई लोग निजी तौर पर जियानी इन्फेंटिनो की कार्यशैली और फैसलों से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि, अधिकांश लोग सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ बोलने या उन्हें चुनौती देने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि कई अधिकारी और संबंधित लोग बंद कमरों में आलोचना करते हैं, लेकिन जब खुलकर अपनी बात रखने का समय आता है तो वे चुप्पी साध लेते हैं।

‘अब पद छोड़ देना चाहिए’

अपने बयान में टेबास ने स्पष्ट कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय में इन्फेंटिनो को अब फीफा अध्यक्ष पद से हट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार मौजूदा अध्यक्ष का समय पूरा हो चुका है, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि इन्फेंटिनो स्वयं पद छोड़ेंगे। टेबास का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था उन्हें पद पर बने रहने का पूरा अवसर देती है और इसी कारण बदलाव की उम्मीद कम दिखाई देती है।

फोलारिन बालोगुन मामले पर भी उठाए सवाल

ला लीगा अध्यक्ष ने फीफा के उस फैसले की भी आलोचना की, जिसमें अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगाया गया एक मैच का निलंबन (सस्पेंशन) वापस ले लिया गया था। बालोगुन को विश्व कप के एक मुकाबले में रेड कार्ड मिलने के बाद एक मैच के लिए प्रतिबंधित किया गया था, लेकिन बाद में फीफा ने उन्हें अगले मुकाबले में खेलने की अनुमति दे दी। टेबास ने इस फैसले को बेहद गंभीर बताते हुए इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

बेल्जियम की जीत का भी किया जिक्र

टेबास ने कहा कि फीफा इस मामले में इसलिए बड़े विवाद से बच गया क्योंकि बेल्जियम ने अमेरिका को हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। उनके अनुसार, यदि अमेरिका आगे बढ़ जाता, तो बालोगुन की पात्रता को लेकर विवाद और अधिक बढ़ सकता था। उन्होंने दावा किया कि उस स्थिति में फीफा नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते थे।

‘यह सिर्फ बड़ी समस्या का एक हिस्सा’

जेवियर टेबास ने कहा कि बालोगुन से जुड़ा विवाद फीफा के कामकाज से जुड़ी बड़ी समस्याओं का केवल एक छोटा हिस्सा है। उनके अनुसार, संगठन की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि इन मुद्दों पर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में फीफा को और बड़े विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

बालोगुन विवाद कैसे शुरू हुआ?

विश्व कप के राउंड ऑफ 32 मुकाबले में बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ अमेरिका की जीत के दौरान फोलारिन बालोगुन को रेड कार्ड मिला था, जिसके बाद उन पर एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया। बाद में फीफा ने यह प्रतिबंध हटाते हुए उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में खेलने की अनुमति दे दी। बेल्जियम ने इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन फीफा ने उसका विरोध खारिज कर दिया। अंततः बेल्जियम ने अमेरिका को हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया, जिसके बाद यह विवाद भी धीरे-धीरे शांत हो गया।

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