पीरियड्स के दर्द से राहत के लिए गर्भासन है असरदार, जानिए फायदे

 पीरियड्स शुरू होते ही कई महिलाओं को तेज दर्द, ऐंठन और पेट में सूजन की शिकायत होती है, जो बेहद कष्टदायक होता है। ऐसे में हर बार पेन किलर का सहारा लेना जरूरी नहीं। योग के माध्यम से इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है। इसी क्रम में गर्भासन एक बहुत प्रभावी योग मुद्रा है। गर्भासन के रोजाना अभ्यास से पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियां कम होती हैं, गर्भाशय स्वस्थ रहता है और मासिक चक्र भी नियमित बनता है। यह आसन तनाव दूर कर शरीर-मन को संतुलित रखने में भी मदद करता है। मोरारजी देसाई नेशनल

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Published On :

फ़रवरी 10, 2026

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 पीरियड्स शुरू होते ही कई महिलाओं को तेज दर्द, ऐंठन और पेट में सूजन की शिकायत होती है, जो बेहद कष्टदायक होता है। ऐसे में हर बार पेन किलर का सहारा लेना जरूरी नहीं। योग के माध्यम से इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है। इसी क्रम में गर्भासन एक बहुत प्रभावी योग मुद्रा है। गर्भासन के रोजाना अभ्यास से पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियां कम होती हैं, गर्भाशय स्वस्थ रहता है और मासिक चक्र भी नियमित बनता है। यह आसन तनाव दूर कर शरीर-मन को संतुलित रखने में भी मदद करता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ने महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गर्भासन को बहुत फायदेमंद बताया है। यह योगासन खासतौर पर स्वस्थ गर्भाशय बनाए रखने और पीरियड्स के दर्द में राहत के साथ ही उसे नियमित करने में मदद करता है। रोजाना कुछ मिनट इस आसन का अभ्यास करने से शरीर और मन दोनों को शांति मिलती है।

गर्भासन का नाम 'गर्भ' यानी भ्रूण और 'आसन' यानी मुद्रा से मिलकर बना है। इस आसन में शरीर की स्थिति भ्रूण जैसी हो जाती है, इसलिए इसे गर्भासन कहते हैं। नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता काफी कम होती है, मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। महिलाओं के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और पीरियड्स से जुड़ी कई समस्याओं में राहत देता है।

इस आसन को सही तरीके से करने के लिए पहले कुछ तैयारी जरूरी है। एक्सपर्ट के अनुसार, गर्भासन शुरू करने से कुछ दिन पहले कुक्कटासन का अभ्यास करें। कुक्कटासन में शरीर का संतुलन अच्छा होने पर ही गर्भासन को आजमाएं। सबसे पहले पद्मासन में बैठें, हाथों को जांघों-पिंडलियों के बीच फंसाकर कोहनियां बाहर निकालें। कोहनियां मोड़कर दोनों कान पकड़ने की कोशिश करें। भार कूल्हों पर रहे। क्षमता अनुसार 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में वापस आएं।

एक्सपर्ट के अनुसार, नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ती है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। हालांकि, कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। गर्भासन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा होता है। कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो, जैसे गर्दन, कंधे या कमर में दर्द, तो सलाह लेकर ही करें।

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