Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष व्रत कब? जानें दिन तारीख और शुभ मुहूर्त

मई 2026 में गुरु प्रदोष व्रत 14 और 28 मई को रखा जाएगा। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानी शाम के समय करना बेहद शुभ माना जाता है।

Guru Pradosh Vrat 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 8, 2026

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Guru Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सफलता का आगमन होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है।

प्रदोष व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है। यह व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो उसे “गुरु प्रदोष व्रत” कहा जाता है। मई 2026 में दो गुरु प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे बेहद शुभ माना जा रहा है।

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तारीख और शुभ मुहूर्त

मई 2026 का पहला गुरु प्रदोष व्रत 14 मई को पड़ रहा है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर व्रत रखेंगे।

त्रयोदशी तिथि

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई 2026, रात 11:21 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई 2026, सुबह 08:32 बजे

प्रदोष काल पूजा मुहूर्त

शाम 05:22 बजे से शाम 07:04 बजे तक

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

मई में दूसरा गुरु प्रदोष व्रत

मई महीने का दूसरा प्रदोष व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। यह व्रत 28 मई 2026 को पड़ेगा। चूंकि यह दिन भी गुरुवार है, इसलिए इसे भी गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

तिथि का समय

त्रयोदशी तिथि शुरू: 28 मई 2026, सुबह 07:56 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 मई 2026, सुबह 09:50 बजे

प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए यह व्रत 28 मई को ही रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से एक ही महीने में दो गुरु प्रदोष व्रत पड़ना अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है।

प्रदोष व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

प्रदोष व्रत के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। व्रत के दौरान केवल फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें। भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानी शाम के समय करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है। इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर तांडव करते हैं। यही कारण है कि इस समय की गई पूजा को अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि प्रदोष व्रत करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से कर्ज, शत्रु बाधा, ग्रह दोष और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

इसके अलावा यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और पारिवारिक सुख-शांति के लिए भी बेहद लाभकारी माना गया है। यही वजह है कि भगवान शिव के भक्तों के बीच प्रदोष व्रत की विशेष मान्यता और लोकप्रियता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।

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