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H-1B Visa Case: भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए खुशखबरी, H-1B वीजा शुल्क बढ़ाने का फैसला खारिज

अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर ऐसा फैसला आया है जिसने हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ट्रंप प्रशासन की एक महत्वपूर्ण योजना पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। आखिर क्या है पूरा मामला, किसे होगा फायदा और आगे क्या हो सकता है, जानिए पूरी जानकारी।

H-1B वीजा शुल्क बढ़ाने का फैसला खारिज

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 9, 2026

H-1B Visa Case: अमेरिका में H-1B वीजा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी संघीय अदालत ने H-1B वीजा आवेदन पर प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया है। इस फैसले को भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि H-1B वीजा का सबसे अधिक लाभ भारतीय नागरिकों को मिलता है।

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राज्यों की चुनौती के बाद अदालत पहुंचा मामला

यह मामला तब अदालत पहुंचा जब 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को चुनौती दी। राज्यों का तर्क था कि इतनी बड़ी फीस लगाना न केवल वीजा प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि अमेरिकी कंपनियों और विदेशी प्रतिभाओं के लिए भी नुकसानदायक साबित होगा। मुकदमे में कहा गया कि प्रशासन द्वारा H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने का फैसला कानूनी अधिकारों के दायरे से बाहर है और इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा तकनीकी क्षेत्रों पर पड़ेगा।

अदालत ने फीस को टैक्स माना

बोस्टन की संघीय जिला अदालत के जज लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में कहा कि H-1B वीजा पर लगाया गया यह शुल्क किसी जुर्माने की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह एक प्रकार का टैक्स है। ऐसे टैक्स लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास होता है, न कि राष्ट्रपति प्रशासन के पास। जज ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) को इस प्रकार की फीस लागू करने का कानूनी अधिकार नहीं दिया गया है। इसलिए यह नीति संविधान और कानून के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

सार्वजनिक क्षेत्रों पर पड़ सकता था नकारात्मक प्रभाव

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि यह नियम लागू रहता तो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नुकसान पहुंच सकता था। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विदेशी विशेषज्ञ और कुशल कर्मचारी H-1B वीजा के माध्यम से काम करते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना वीजा आवेदनों पर अतिरिक्त कर लगाना प्रशासन के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसलिए इस नीति को जारी नहीं रखा जा सकता।

ट्रंप प्रशासन करेगा अपील

हालांकि अमेरिकी सरकार ने अदालत के फैसले से असहमति जताई है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि प्रशासन इस निर्णय के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करेगा। उनका कहना है कि सरकार को भरोसा है कि अपील प्रक्रिया में यह फैसला पलटा जा सकता है।

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भारतीयों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

H-1B वीजा अमेरिका में कुशल विदेशी कर्मचारियों को काम करने की अनुमति देता है। हर साल लगभग 65,000 नए H-1B वीजा जारी किए जाते हैं, जबकि उच्च शिक्षा प्राप्त विशेषज्ञों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा भी उपलब्ध कराए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार स्वीकृत H-1B वीजा में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी भारतीय पेशेवरों की होती है। पहले कंपनियों को H-1B वीजा के लिए सामान्यतः 2,000 से 5,000 डॉलर तक का शुल्क देना पड़ता था, लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की फीस ने चिंता बढ़ा दी थी। अब अदालत के फैसले के बाद भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों और अन्य कुशल कर्मचारियों के लिए अमेरिका में रोजगार के अवसर पहले की तरह बने रहने की उम्मीद है।