Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य की सभी सहकारी चीनी मिलों को एक वर्ष के भीतर घाटे से बाहर निकालकर लाभ की स्थिति में लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन मिलों के संचालन में मौजूद कमियों की गहराई से समीक्षा की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सहकारी चीनी मिलों का सीधा संबंध किसानों की आय से है, इसलिए उनका आर्थिक रूप से मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है।
राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का आयोजन 6 से 9 जून तक, CGPSC ने जारी किए एडमिट कार्ड
सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक
हरियाणा विजन-2047 के तहत सहकारिता विभाग की पांच वर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह सख्त रुख अपनाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निजी चीनी मिलें मुनाफे में चल रही हैं, तो सहकारी क्षेत्र की मिलें लगातार घाटे में क्यों हैं। इस असंतुलन को दूर करने के लिए उन्होंने ठोस सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
632 करोड़ रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार अब तक सहकारी चीनी मिलों को 632 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर चुकी है। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार न होने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
आधुनिकीकरण और नए प्रोजेक्ट्स पर फोकस
मुख्यमंत्री ने चीनी मिलों के आधुनिकीकरण को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने एथेनॉल उत्पादन और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित करने की योजनाओं को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए। लक्ष्य रखा गया है कि अगले वित्तीय वर्ष तक सभी सहकारी चीनी मिलों में सीबीजी प्लांट स्थापित कर दिए जाएं, जिससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा बल्कि मिलों की आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे।
तकनीकी दक्षता और प्रशिक्षण पर जोर
कुशल मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने आईटीआई संस्थानों में चीनी उद्योग से संबंधित विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और उद्योग को प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे कार्यक्षमता में सुधार होगा।
अनुपमा’ की स्टारकास्ट का मस्तीभरा डांस वीडियो वायरल, रुपाली गांगुली ने दिखाया जबरदस्त अंदाज
डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
बैठक में मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डेयरी क्षेत्र के विस्तार पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को डेयरी और चारा उत्पादन के लिए पंचायत भूमि लीज पर देने जैसे प्रस्तावों पर काम करने के निर्देश दिए। साथ ही पशुधन के लिए चारे की दीर्घकालिक योजना बनाने पर भी जोर दिया गया।
जवाबदेही और सुधार की सख्त नीति
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सहकारी संस्थानों को केवल सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि सहकारी चीनी मिलें न केवल घाटे से बाहर आएं, बल्कि लाभकारी मॉडल के रूप में स्थापित हों।
सबालेंका का दमदार प्रदर्शन जारी, लगातार 14वें ग्रैंडस्लैम क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं










