Haryana News: बैंक घोटाले में IAS अफसर पर गिरफ्तारी की तलवार, कोर्ट में लगाई गुहार

हरियाणा के बहुचर्चित बैंक घोटाले में नाम आने के बाद निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए पंचकूला की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 29, 2026

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Haryana News: हरियाणा के बहुचर्चित बैंक घोटाले में कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मामले में नाम आने और निलंबन के बाद, आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए पंचकूला की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। पंचकूला अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 2 जुलाई की तारीख निर्धारित की है और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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घोटाले की जड़ें और प्रदीप कुमार की भूमिका

सीबीआई की जांच के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय का है जब प्रदीप कुमार ‘हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ में सदस्य सचिव के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान बोर्ड के सरकारी धन के निवेश और बैंक खातों से संबंधित निर्णयों में भारी अनियमितताएं बरती गईं। जांच एजेंसी का मुख्य आरोप है कि आईडीएफसी बैंक के एक खाते से 169 करोड़ रुपये की बड़ी राशि का गबन किया गया।

सीबीआई ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि जब इस मामले की जांच शुरू हुई और अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, तो प्रदीप कुमार अपने गुरुग्राम स्थित आवास पर नहीं मिले। साथ ही, उनका मोबाइल फोन भी बंद पाया गया, जिससे उनकी भूमिका और भी संदिग्ध हो गई है।

बड़े गिरोह का पर्दाफाश

इस घोटाले की कड़ियां केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं हैं। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि बोर्ड के नियमों का उल्लंघन करके सरकारी धन को निजी बैंकों में निवेश किया गया था। इस मामले में बोर्ड के डेटा एंट्री ऑपरेटर सौरव शर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर धन का निवेश करवाया, जिससे राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 169.36 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा।

जांच में यह खुलासा भी हुआ है कि यह करोड़ों रुपये की राशि विभिन्न ‘शेल कंपनियों’ (फर्जी कंपनियों) के खातों में ट्रांसफर की गई थी। सीबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 70 करोड़ रुपये ‘स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ को और 53 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ‘कैपसीपी फिनटेक सर्विसेज’ को भेजी गई थी। यह पूरी प्रक्रिया संगठित तरीके से की गई थी, जिसमें सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।

आठ आईएएस अधिकारियों पर मंडरा रहा खतरा

यह घोटाला राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाने वाला है, क्योंकि इसमें कुल आठ आईएएस अधिकारी जांच के दायरे में हैं। इस प्रकरण में अब तक दो आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक अन्य अधिकारी फरार बताया जा रहा है। प्रदीप कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद, शेष पांच आईएएस अधिकारियों की स्थिति भी स्पष्ट होगी, जिनकी भूमिका पर सीबीआई की पैनी नजर है।

फिलहाल, 2 जुलाई की सुनवाई पूरे मामले की दिशा तय करेगी। यह मामला न केवल वित्तीय भ्रष्टाचार की एक बड़ी मिसाल है, बल्कि यह उन खामियों की ओर भी इशारा करता है, जो उच्च स्तरीय सरकारी संस्थाओं में निजी स्वार्थ के लिए अपनाई गई थीं। प्रशासन और न्यायपालिका के लिए यह केस एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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