Haryana News: हरियाणा के जींद जिले के खोखरी गांव में अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई उस समय विवादों में आ गई जब प्रशासनिक स्तर पर तैयार की गई योजना के बावजूद मौके पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई। जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित इस अभियान का उद्देश्य गांव की एक गली से अवैध कब्जा हटवाना था, लेकिन अंतिम समय में पुलिस सहयोग न मिलने के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई।
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डीसी के आदेश पर शुरू हुई थी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, उपायुक्त (DC) के निर्देश पर उपमंडल अधिकारी (SDM) जींद सत्यवान सिंह मान ने कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की थी। इसके तहत बिजली विभाग के एसडीओ गुलशन कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था ताकि वे मौके पर मौजूद रहकर कार्रवाई को सुचारु रूप से पूरा करवा सकें। प्रशासन की योजना के अनुसार 4 जून को खोखरी गांव में अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू होनी थी, जिसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की आवश्यकता थी।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठी समस्या
ड्यूटी मजिस्ट्रेट गुलशन कुमार ने कार्रवाई के लिए 10 पुरुष और 5 महिला पुलिसकर्मियों की मांग की थी, ताकि मौके पर किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, जब टीम मौके पर पहुंचने वाली थी, उसी दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला। सदर थाना के SHO ने पुलिस बल उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया, जिससे पूरी कार्रवाई रुक गई। SHO ने बताया कि वह उस समय अन्य कार्यों में व्यस्त थे और उनके पास अतिरिक्त पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं थे।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने जताई नाराजगी
इस घटनाक्रम पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट गुलशन कुमार ने कहा कि वे प्रशासनिक आदेशों के तहत गांव में अवैध कब्जा हटाने के लिए पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे, लेकिन पुलिस सहयोग न मिलने के कारण कार्रवाई संभव नहीं हो सकी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब जिला प्रशासन (DC) और उपमंडल अधिकारी (SDM) द्वारा स्पष्ट आदेश दिए गए थे, तो उनका पालन सुनिश्चित करना पुलिस विभाग की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इसे प्रशासनिक समन्वय में कमी का मामला बताया।
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प्रशासनिक समन्वय पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के बीच समन्वय को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर अवैध कब्जे लंबे समय से स्थानीय स्तर पर समस्या बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक आदेशों के बावजूद कार्रवाई का रुक जाना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में अवैध कब्जों की समस्या पहले से ही बनी हुई है और प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई की योजना बनाता रहा है, लेकिन कई बार ऐसी अड़चनों के कारण अभियान अधूरे रह जाते हैं।
पुलिस का पक्ष
इस मामले पर सदर थाना प्रभारी (SHO) ने भी अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वे उस समय अन्य महत्वपूर्ण कार्य में व्यस्त थे और उन्हें आवश्यक पुलिस बल भी उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था देना संभव नहीं हो सका।
आगे की स्थिति पर नजर
इस घटना के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर आगे की रणनीति को लेकर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि भविष्य में ऐसी कार्रवाई के लिए बेहतर समन्वय और पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि अवैध कब्जा हटाने जैसे अभियानों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
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