Haryana News: NEET पेपर लीक मामले में SIT की बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड डॉक्टर गिरफ्तार

NEET-UG पेपर लीक मामले में SIT और केंद्रीय एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे एक डॉक्टर को दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के पास से गिरफ्तार किया गया है, जिसे पेपर लीक गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 13, 2026

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Haryana News: देशभर में चर्चा का विषय बने NEET-UG पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। परीक्षा में हुई कथित धांधली की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) और केंद्रीय एजेंसियों ने लंबे समय से फरार चल रहे एक डॉक्टर को दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर पेपर लीक रैकेट का मुख्य सरगना होने का आरोप है।

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खुफिया सूचना के आधार पर हुई गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों को आरोपी की गतिविधियों के बारे में अहम इनपुट मिले थे। इसके बाद पुलिस और केंद्रीय टीमों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दिल्ली-हरियाणा सीमा क्षेत्र में घेराबंदी की। बताया जा रहा है कि आरोपी डॉक्टर अपनी लोकेशन बदलने की कोशिश कर रहा था, तभी उसे हिरासत में ले लिया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी पूरे पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े कई बड़े राज खोल सकती है। फिलहाल आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है।

कई राज्यों के सॉल्वर गैंग से जुड़े मिले तार

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार डॉक्टर के संपर्क बिहार, राजस्थान और हरियाणा में सक्रिय सॉल्वर गैंग से जुड़े हुए थे। एजेंसियों के मुताबिक आरोपी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक करवाने और फिर अभ्यर्थियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाकर उत्तर याद करवाने का काम करता था। सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें दलाल, कोचिंग संचालक और तकनीकी सहायता देने वाले सदस्य शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने में जुटी हैं।

छात्रों से लाखों रुपये लेने का आरोप

प्रारंभिक पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर छात्रों और उनके परिजनों से भारी रकम वसूली जाती थी। एक छात्र से 30 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक की डील किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस अवैध कमाई का इस्तेमाल कहां किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

मोबाइल और बैंक खातों की होगी जांच

पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच शुरू कर दी गई है। एजेंसियों को शक है कि इस रैकेट में कुछ प्रभावशाली लोगों और कोचिंग संस्थानों की भी भूमिका हो सकती है। डिजिटल डेटा की जांच से कई महत्वपूर्ण सबूत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल

इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों छात्र और अभिभावक परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर चिंता जता रहे हैं। कई छात्र अब री-एग्जाम की संभावनाओं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

सरकार और जांच एजेंसियों ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों तक भी पहुंचा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे देश के सबसे बड़े मेडिकल प्रवेश परीक्षा घोटालों में से एक की कई परतें सामने आ सकती हैं।

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