Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी होगी दूर

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों तथा फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल शिक्षा नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों को अब पीजी शिक्षा प्राप्त करने के दौरान कई प्रकार की प्रशासनिक और वित्तीय बाधाओं से राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी। Haryana News: हरियाणा का सबसे हराभरा जिला बना यमुनानगर, 60 लाख से ज्यादा पेड़ों

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 4, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों तथा फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल शिक्षा नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों को अब पीजी शिक्षा प्राप्त करने के दौरान कई प्रकार की प्रशासनिक और वित्तीय बाधाओं से राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी।

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क्लीनिकल स्पेशलिटी डॉक्टरों को बड़ी राहत

जानकारी के अनुसार, जो भी डॉक्टर सरकारी सेवा में रहते हुए क्लीनिकल स्पेशलिटी में पीजी डिग्री प्राप्त करेंगे, उन्हें अब मेडिकल एजुकेशन बांड भरने की आवश्यकता नही होगी। पहले डॉक्टरों को उच्च शिक्षा के लिए कई शर्तों और बांड की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिससे उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता था। अब ऐसे डॉक्टर अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने मूल विभाग में ही कार्य जारी रख सकेंगे। इससे न केवल डॉक्टरों को सुविधा मिलेगी बल्कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

नॉन-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल

सरकार ने नॉन-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल विषयों में विशेषज्ञता प्राप्त करने वाले डॉक्टरों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की है। इन चिकित्सकों को निर्धारित शिक्षण अवधि पूरी करने के बाद मेडिकल शिक्षा संस्थानों में कम से कम तीन वर्षों तक सेवा देनी होगी।

इस सेवा अवधि के पूर्ण होने पर उन्हें स्थायी नियुक्ति का अवसर प्रदान किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में योग्य शिक्षकों की संख्या बढ़ाना और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाना है।

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी संकट का होगा समाधान

आपको बता दें कि, हरियाणा के कई सरकारी मेडिकल कॉलेज लंबे समय से अनुभवी फैकल्टी और प्रोफेसरों की कमी से जूझ रहे हैं। इस कारण मेडिकल छात्रों की शिक्षा और प्रशिक्षण पर भी असर पड़ता रहा है। नई पीजी नीति के लागू होने से कॉलेजों को योग्य शिक्षकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चिकित्सा शिक्षा प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाएगा और मेडिकल संस्थानों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में आएगा सुधार

अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि सरकार का यह निर्णय केवल मेडिकल कॉलेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से सरकारी अस्पतालों में बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी और मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।

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शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा नया आधार

नई मेडिकल पीजी नीति हरियाणा के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखी जा रही है। इससे डॉक्टरों को करियर विकास के बेहतर अवसर मिलेंगे, मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी और आम जनता को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल भविष्य में राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक सक्षम तथा आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।