Haryana News: हरियाणा में शिक्षकों के स्थानांतरण (ट्रांसफर) से जुड़ी कैडर परिवर्तन नीति पर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जरूरी निर्णय लिया है। अदालत ने राज्य सरकार को इस विषय पर नई और अधिक उपयुक्त नीति तैयार करने की अनुमति प्रदान की है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई नीति बनाते समय कई महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखना अनिवार्य होगा। यह मामला जूनियर बेसिक ट्रेनिंग (जेबीटी) शिक्षकों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा हुआ है, जिसमें मौजूदा ट्रांसफर व्यवस्था को चुनौती दी गई थी।
नई नीति बनाने की छूट
हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार नई ट्रांसफर नीति तैयार कर सकती है, लेकिन इसे शिक्षकों के हितों के अनुरूप और पारदर्शी बनाना जरूरी होगा।
अदालत ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया कि नीति बनाते समय शिक्षकों द्वारा उठाई गई सभी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। इनमें भेदभाव, वरिष्ठता में बदलाव, सेवा शर्तों पर प्रभाव और पदोन्नति से जुड़े संभावित नुकसान जैसे मुद्दे शामिल हैं।
शिक्षकों की याचिका में उठे गंभीर सवाल
याचिकाकर्ता जेबीटी शिक्षकों ने अदालत में दलील दी थी कि वर्तमान कैडर परिवर्तन नीति के तहत शिक्षकों का एक कैडर से दूसरे कैडर में स्थानांतरण किया जा सकता है। उनका कहना था कि इस व्यवस्था से उनकी नौकरी की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है और वरिष्ठता क्रम भी बदल सकता है।
इसके अलावा शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि नीति के कुछ प्रावधान मनमाने ढंग से बनाए गए हैं, जिससे असमानता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। याचिकाओं में यह भी कहा गया कि इससे संभावित रूप से लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
पारदर्शिता और समानता पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया कि ट्रांसफर नीति के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी है। शिक्षकों का कहना था कि स्थानांतरण प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के बजाय असमान तरीके से लागू की जा रही है, जिससे कई स्तरों पर असंतोष पैदा हो रहा है। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि इससे पहले भी माडल ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर इसी तरह की कानूनी चुनौती दी जा चुकी है, जिस पर हाईकोर्ट ने मई 2026 में निर्णय सुनाया था।
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आगे की प्रक्रिया पर नजर
अब इस मामले में राज्य सरकार को नई ट्रांसफर नीति तैयार करनी होगी, जिसमें अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना अनिवार्य रहेगा। माना जा रहा है कि नई नीति में शिक्षकों के हितों, वरिष्ठता संरचना और सेवा सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले के बाद शिक्षकों को जहां कुछ राहत मिली है, वहीं सरकार के लिए संतुलित और पारदर्शी नीति तैयार करना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।










