Haryana News: गुरुग्राम छोड़ पूरे हरियाणा में स्टिल्ट+4 निर्माण को मंजूरी, बुलडोजर कार्रवाई जारी

हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने हरियाणा में निर्माण नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर पूरे राज्य में स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण को मंजूरी मिल गई है, वहीं गुरुग्राम में अब भी रोक बरकरार है, आखिर इसके पीछे की असली वजह क्या है

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 28, 2026

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Haryana News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने स्टिल्ट पल्स फोर निर्माण नीति को लेकर एक जरूरी निर्णय सुनाया है, जिससे हरियाणा के अधिकांश क्षेत्रों में लोगों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि इस नीति पर रोत लगाई गई थी, वह सिर्फ गुरुग्राम जिले तक सीमित है। इसका अर्थ है कि गुरुग्राम को छोड़कर हरियाणा के अन्य जिलों में स्टिल्ट प्लस फोर के तहत चार मंजिला तक भवन निर्माण की अनुमति जारी रहेगी।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बैरी की खंडपीठ ने यह भी साफ किया कि गुरुग्राम में फिलहाल किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। अदालत ने गुरुग्राम की खराब होती शहरी व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां पहले से ही जनसंख्या और अव्यवस्थित विकास का दबाव अधिक है, जिससे हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि शहर में अतिक्रमण के कारण पैदल चलने तक की जगह नहीं बची है।

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बुलडोजर कार्रवाई पर रोक से इनकार

हाईकोर्ट ने राज्यभर में अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई को रोकने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सरकार कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई कर रही है, तो उसे जारी रखा जा सकता है। कोर्ट का मानना है कि शहरी व्यवस्था को सुधारने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।

पहले के आदेश की व्याख्या

यह फैसला 2 अप्रैल को जारी किए गए अंतरिम आदेश की व्याख्या करते हुए दिया गया है। उस आदेश को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसे अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या लोग वास्तव में गुरुग्राम में सुधार चाहते हैं या नहीं, क्योंकि बिना सख्त कदमों के स्थिति में सुधार संभव नहीं है।

जनहित याचिका पर सुनवाई जारी

यह मामला एक जनहित याचिका के तहत अदालत में विचाराधीन है। याचिकाकर्ताओं ने स्टिल्ट प्लस फोर नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया है। उनका तर्क है कि पहले एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जानी चाहिए थी, उसके बाद ही अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति दी जानी चाहिए थी।

बुनियादी ढांचे पर बढ़ेगा दबाव

हाईकोर्ट ने भी इस बात से सहमति जताई कि बिना पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं के बहुमंजिला इमारतों की अनुमति देने से शहरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इससे सीवरेज, जल निकासी, ट्रैफिक जाम और जलभराव जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। अदालत ने संकेत दिया कि इस नीति की वैधता और प्रभाव का परीक्षण अभी बाकी है।

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नीति की न्यायिक समीक्षा जारी

अंत में कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की यह नीति अभी न्यायिक समीक्षा के अधीन है और इस पर अंतिम निर्णय आने तक सुनवाई जारी रहेगी। तब तक, गुरुग्राम को छोड़कर बाकी हरियाणा में स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण की अनुमति बनी रहेगी, जबकि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई भी जारी रहेगी।

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