Hezbollah Rejects Ceasefire : लेबनान और इजरायल के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। हाल ही में हुए इजरायली हमलों में कम से कम चार नागरिकों की मौत के बाद, सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल और लेबनानी सरकार के बीच तैयार किए गए नए युद्धविराम (सीजफायर) समझौते को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस ताजा घटनाक्रम और दोनों पक्षों के बीच लगातार जारी भीषण गोलाबारी ने क्षेत्र में शांति बहाली के वैश्विक प्रयासों को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
नईम कासिम ने प्रस्ताव को बताया अपमानजनक
हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने टेलीविजन पर जारी एक लिखित संदेश में इस नए समझौते की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे बेतुका, अपमानजनक और लेबनान की संप्रभुता के खिलाफ बताया। कासिम ने कहा कि इस प्रस्ताव में दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के लड़ाकों को हटाने की शर्त रखी गई है, जिसे स्वीकार करना दुश्मन के सामने आत्मसमर्पण करने और उसकी शर्तों को मानने जैसा है। उन्होंने साफ किया कि हिजबुल्लाह की पहली प्राथमिकता इजरायली हमलों को रोकना, पूर्ण युद्धविराम लागू करना और लेबनानी क्षेत्र से इजरायली सेना की पूरी तरह से वापसी सुनिश्चित करना है।
उत्तरी इजरायल की सुरक्षा पर हिजबुल्लाह की चेतावनी
हिजबुल्लाह प्रमुख ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि संगठन ने लड़ाई को रोकने या धीमा करने का कोई वादा नहीं किया है। उन्होंने इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक लेबनान के गांव असुरक्षित रहेंगे, वहां बमबारी और तबाही जारी रहेगी और उनके लोग मारे जाएंगे, तब तक उत्तरी इजरायल के नागरिक भी कभी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे।
इजरायली हवाई हमलों में चार लोगों की जान गई
हिजबुल्लाह का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब स्थानीय प्रशासन के मुताबिक इजरायली बमबारी में चार लोगों की मौत हो गई। इस हिंसक टकराव की चपेट में आकर संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UN) का एक जवान भी क्रॉसफायर के दौरान मारा गया। वहीं दूसरी तरफ, दक्षिणी लेबनान के मैदानी इलाके में हिजबुल्लाह के साथ आमने-सामने की जंग में एक इजरायली सैनिक के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है।
नेतन्याहू की बैठक के दौरान गूंजे सायरन
नईम कासिम का बयान आने के तुरंत बाद उत्तरी इजरायल के सीमावर्ती इलाकों में संभावित ड्रोन हमले के सायरन बजने लगे। यह सायरन श्लोमी कस्बे में भी गूंजे, जहां इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने वरिष्ठ मंत्रियों और स्थानीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा समीक्षा बैठक कर रहे थे। हालांकि, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय और स्थानीय मीडिया ने पुष्टि की कि नेतन्याहू सायरन बजने से कुछ समय पहले ही सुरक्षित रूप से वहां से रवाना हो चुके थे।
ड्रोन हमलों को नाकाम करने की सैन्य कोशिशें
बाद में इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने एक बयान जारी कर बताया कि यह सायरन उन संदिग्ध ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करने की कोशिशों के दौरान बजाए गए थे, जो दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायली सैनिकों की अग्रिम चौकियों के काफी करीब आ गिरे थे। इस हवाई हमले में किसी भी सैनिक या नागरिक के घायल होने की खबर नहीं है।
इजरायली सेना प्रमुख ने माना आंतरिक दबाव
इस बीच, इजरायली सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामिर ने स्वीकार किया कि इस लंबे खिंचते युद्ध के कारण उत्तरी इजरायल के शहरों पर बहुत भारी दबाव है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ईरान और लेबनान के भीतर इजरायल द्वारा किए गए हमलों ने मध्य पूर्व में एक नई सुरक्षा स्थिति पैदा कर दी है, जिससे ईरान और हिजबुल्लाह की सैन्य ताकत को अब तक का सबसे बड़ा नुकसान पहुंचा है।
दिब्बीन गांव में दाखिल हुई लेबनानी सेना
लेबनान की सरकारी मीडिया के अनुसार, गुरुवार दोपहर को लेबनानी राष्ट्रीय सेना संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों (UNIFIL) के साथ समन्वय स्थापित कर दक्षिणी लेबनान के दिब्बीन गांव में प्रवेश कर गई। यह रणनीतिक कदम तब उठाया गया, जब इजरायली सेना ने पिछले कुछ दिनों से भारी संघर्ष के केंद्र रहे इस सीमावर्ती इलाके को पूरी तरह खाली कर दिया। करीब तीन महीने पहले शुरू हुए इस ताजा युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के किसी मोर्चे से पीछे हटी है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर बुरा असर
दक्षिणी लेबनान में इजरायल के बढ़ते सैन्य नियंत्रण और लगातार जारी गोलाबारी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने के प्रयास प्रभावित हो रहे हैं। इस तनाव की वजह से ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह खोलने की प्रक्रिया बाधित हो रही है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थायी शांति समझौते के दायरे में लेबनान को शामिल करना अनिवार्य होगा।
नेतन्याहू और ट्रंप के रुख में स्पष्ट भिन्नता
चुनावी साल का सामना कर रहे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि इजरायल का सैन्य अभियान तब तक नहीं रुकेगा, जब तक हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कूटनीतिक विफलता को बहुत तूल न देते हुए एक अलग दृष्टिकोण रखा। ट्रंप ने अपने परिचित अंदाज में कहा कि मध्य पूर्व में युद्धविराम का सीधा सा मतलब केवल यह होता है कि वहां गोलीबारी की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी कम हो गई है।
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