Himachal Pradesh Forest Fire: हिमाचल के जंगलों में आग का तांडव, 3300 हेक्टेयर वन संपदा खाक, वन्यजीवों पर मंडराया संकट

हिमाचल प्रदेश में भीषण गर्मी के कारण जंगलों की आग लगातार बेकाबू होती जा रही है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, सोलन में 125 हेक्टेयर, ऊना में 25 हेक्टेयर और हमीरपुर की 21 वन बीटों में आग से भारी तबाही हुई है।

Himachal Pradesh Forest Fire

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 29, 2026

Himachal Pradesh Forest Fire: भीषण गर्मी और शुष्क मौसम के चलते हिमाचल प्रदेश के जंगल इन दिनों धू-धू कर जल रहे हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में वनों में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे न केवल बहुमूल्य वन संपदा का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि बेजुबान वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। 15 अप्रैल से 28 मई 2026 तक राज्य में आग की 263 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिसमें लगभग 3300 हेक्टेयर वन भूमि जलकर राख हो गई है।

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विभिन्न जिलों में तबाही की स्थिति

आग की लपटें राजधानी शिमला से लेकर सोलन, बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर और मंडी तक फैल चुकी हैं। सोलन के जंगलों में लगी आग ने कालका-शिमला रेललाइन को भी प्रभावित किया। आग के कारण ट्रेनों को करीब ढाई घंटे तक रोकना पड़ा। वहीं, शिमला के टुटीकंडी और बाग गांव के पास लगी आग ने वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया है।

बिलासपुर के जुखाला क्षेत्र और कुल्लू की ऊझी घाटी में देवदार व काईल के पौधों को आग से भारी क्षति पहुंची है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल 28 मई तक आग से लगभग 82 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

आग लगने के कारण और चुनौती

राजस्व मंत्री जगत नेगी ने स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि पहाड़ी इलाकों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आग बुझाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। अक्सर आग ऐसी जगहों पर लगती है जहाँ दमकल विभाग की गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं। इसे देखते हुए सरकार हेलीकॉप्टर (हेली-टैंकर) के उपयोग पर विचार कर रही है, ताकि दुर्गम क्षेत्रों में पानी छिड़काव किया जा सके।

मानवीय लापरवाही

जंगलों में आग लगने का एक बड़ा कारण मानवीय लापरवाही और कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा घास उगाने के लालच में आग लगाना है। चीड़ के जंगलों (पाइन फारेस्ट) में आग की तीव्रता और प्रसार बहुत तेज होता है, जो देखते ही देखते रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाती है।

पिछले वर्षों की तुलना और वन विभाग की अपील

वन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो आग की घटनाएं चिंताजनक हैं:

वर्ष 2026-27 (अब तक): 263 मामले

वर्ष 2025-26: 561 मामले

वर्ष 2024-25: 2613 मामले

वर्ष 2023-24: 2938 मामले

विभाग का कहना है कि हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में प्रयासों से आग पर नियंत्रण पाने की कोशिशें तेज हुई हैं, लेकिन जनभागीदारी के बिना इसे पूरी तरह रोकना असंभव है। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि जंगलों के आसपास सिगरेट, बीड़ी या जलती हुई वस्तुएं न फेंकें। यदि कहीं भी आग की चिंगारी दिखे, तो तुरंत वन विभाग और प्रशासन को सूचित करें। पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बचाने के लिए अब सतर्क रहने का समय आ गया है।

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