INDIA Block Meeting 2026: दिल्ली में आयोजित होने जा रही INDIA गठबंधन की अहम बैठक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। हालांकि, वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में हिस्सा लेंगे। इसकी जानकारी उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्धव ठाकरे भले ही दिल्ली न आएं, लेकिन वह गठबंधन की रणनीतिक चर्चा में वर्चुअल रूप से जुड़ेंगे।
संजय राउत का बयान और पार्टी का रुख
संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर बताया कि उद्धव ठाकरे वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लेंगे। उन्होंने लिखा कि शिवसेना (यूबीटी) INDIA गठबंधन की मजबूत सदस्य बनी हुई है और पार्टी का उद्देश्य इसे और अधिक एकजुट और प्रभावी बनाना है। उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी गठबंधन देश के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों का मिलकर सामना करेगा और 2029 तक एक बड़े राजनीतिक बदलाव की दिशा में काम करेगा।
INDIA गठबंधन की रणनीतिक बैठक
यह बैठक दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित की जा रही है, जिसमें विपक्षी दलों के बीच रणनीति पर चर्चा की जाएगी। मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को चुनौती देने के लिए एक संयुक्त रणनीति तैयार करना है। इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव सहित कई बड़े नेता शामिल होने की संभावना है। कुल मिलाकर 23 विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं की भागीदारी इस बैठक में अपेक्षित है।
आम आदमी पार्टी और डीएमके की दूरी
इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह इस गठबंधन से अलग रुख अपना चुकी है। पार्टी ने बैठक में शामिल न होने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, तमिलनाडु की द्रमुक (DMK) ने भी बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा की है। यह फैसला तब लिया गया जब कांग्रेस और डीएमके के बीच कुछ राजनीतिक मतभेद सामने आए।
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विपक्षी एकता पर नजर
INDIA गठबंधन की यह बैठक आगामी चुनावी रणनीति और विपक्षी एकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि कुछ दलों की अनुपस्थिति और वर्चुअल भागीदारी से यह साफ है कि गठबंधन के भीतर अभी भी समन्वय और एकजुटता को लेकर चुनौतियां मौजूद हैं। फिर भी, नेताओं का कहना है कि लक्ष्य भाजपा के खिलाफ एक मजबूत और संगठित मोर्चा तैयार करना है, जो आने वाले चुनावों में प्रभावी भूमिका निभा सके।










