LPG Crisis: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव के बीच भारत में ईंधन की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को केंद्र सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे जानबूझकर चलाए जा रहे किसी भी शरारती या भ्रामक अभियान का हिस्सा न बनें और न ही घबराकर खरीदारी करें।
देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता
पीआईबी (PIB) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत की ईंधन सुरक्षा बेहद मजबूत स्थिति में है। वर्तमान में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है और पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में विश्व का 5वां सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। भारत आज 150 से अधिक देशों को रिफाइंड फ्यूल (परिष्कृत ईंधन) की आपूर्ति कर रहा है।
चूंकि भारत पेट्रोलियम उत्पादों का एक शुद्ध निर्यातक (Net Exporter) है, इसलिए घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से (Structurally) पूरी तरह सुनिश्चित है। सरकार ने पुष्टि की है कि देश भर में फैले 1 लाख से अधिक रिटेल फ्यूल आउटलेट्स सामान्य रूप से खुले हैं और वहां बिना किसी बाधा के ईंधन का वितरण किया जा रहा है।
भारत का कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार
मिडिल ईस्ट संकट के 27वें दिन भी भारत की ऊर्जा स्थिति स्थिर बनी हुई है। सरकार ने डेटा साझा करते हुए बताया कि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति के अनुबंध (Contracts) पहले ही सुरक्षित कर लिए हैं। इसका मतलब है कि अगले दो महीनों तक कच्चे तेल की खरीद और आवक में कोई समस्या नहीं आएगी।
भारत की कुल तेल आरक्षित क्षमता (Oil Storage Capacity) 74 दिनों की है, जबकि वर्तमान में वास्तविक स्टॉक कवर लगभग 60 दिनों का उपलब्ध है। इस स्टॉक में कच्चा तेल, तैयार उत्पाद और भूमिगत गुफाओं (Strategic Reserves) में जमा समर्पित भंडार शामिल है। अतः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अस्थिरता का फिलहाल घरेलू आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
रिफाइनरी उत्पादन में 40% की भारी बढ़ोतरी
आम नागरिकों के बीच LPG की कमी को लेकर फैली घबराहट पर मंत्रालय ने विशेष स्पष्टीकरण दिया है। मंत्रालय द्वारा जारी ‘एलपीजी नियंत्रण आदेश’ के बाद, घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में 40% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में, भारत की कुल दैनिक आवश्यकता लगभग 80 टीएमटी (TMT) है, जिसके मुकाबले घरेलू उत्पादन ही 50 टीएमटी तक पहुंच गया है। यानी हमारी जरूरत का 60% से अधिक हिस्सा अब घरेलू स्तर पर ही तैयार हो रहा है।
तेल कंपनियां वर्तमान में प्रतिदिन 50 लाख से अधिक गैस सिलेंडर की सफल डिलीवरी कर रही हैं। मंत्रालय ने गौर किया कि अफवाहों के कारण घबराहट (Panic Booking) में आकर उपभोक्ताओं ने भारी मात्रा में ऑर्डर देना शुरू कर दिया था, जिससे मांग अचानक 89 लाख सिलेंडर तक पहुंच गई थी। हालांकि, स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब यह मांग वापस सामान्य स्तर (50 लाख सिलेंडर) पर आ गई है।









