India US Trade Deal: पीयूष गोयल ने गिनाए फायदे, किसानों और निर्यातकों की हुई चांदी

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बारीकियों को साझा करते हुए इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा टैरिफ घटाकर 18% करने से भारतीय टेक्सटाइल, लेदर और जेनेरिक दवाओं के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के द्वार खुल गए हैं। क्या यह समझौता सच में $30 ट्रिलियन का अवसर है?

India US Trade Deal

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 7, 2026

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India US Trade Deal:  भारत और अमेरिका के बीच पिछले काफी समय से जारी व्यापारिक गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक ‘ट्रेड डील’ के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने बताया कि यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे विशेष रूप से भारतीय किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और लाभ मिलेगा।

टैरिफ में बड़ी कटौती: भारतीय उत्पादों को मिलेगी ग्लोबल प्रतिस्पर्धा

पीयूष गोयल ने समझौते की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि अब भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले माल पर अधिकतम टैरिफ की सीमा 18 प्रतिशत तय कर दी गई है। इससे भी बड़ी खबर यह है कि सरकार ने कई प्रमुख श्रेणियों के उत्पादों को पूरी तरह से ‘टैरिफ-फ्री’ यानी शून्य शुल्क की श्रेणी में शामिल करवाने में सफलता प्राप्त की है। इस कदम से अमेरिकी बाजारों में भारतीय सामान की कीमतें कम होंगी, जिससे वे अन्य देशों के उत्पादों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और भारत के कुल निर्यात में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है।

कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी जीत: चाय, मसाले और फल अब होंगे शुल्क मुक्त

इस व्यापारिक समझौते में भारतीय कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। वाणिज्य मंत्री के अनुसार, अब भारत से अमेरिका निर्यात होने वाली चाय, मसाले, कॉफी, नारियल तेल और वनस्पति मोम जैसे उत्पादों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। इसके अतिरिक्त, ताजे फलों जैसे आम, केला, पपीता, अमरूद, अनानास और कीवी के साथ-साथ मशरूम और अनाज जैसे उत्पादों को भी जीरो-टैरिफ की श्रेणी में रखा गया है। यह फैसला सीधे तौर पर करोड़ों भारतीय किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, क्योंकि उन्हें अब दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार तक सीधी और सस्ती पहुंच मिलेगी।

घरेलू सुरक्षा का कवच: किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं

पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के विस्तार के साथ-साथ सरकार ने भारतीय उत्पादकों के हितों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि डेयरी उत्पाद, अनाज और कुछ विशिष्ट मसालों को संवेदनशील सूची में रखा गया है ताकि उनका अनियंत्रित आयात भारत में न हो सके। इससे घरेलू बाजार में कीमतों के गिरने का खतरा नहीं रहेगा और भारतीय किसानों का हित पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। सरकार का लक्ष्य निर्यात बढ़ाना है, न कि घरेलू बाजार को विदेशी सामान से पाट देना।

दवाओं और आभूषणों का दबदबा: 13 अरब डॉलर के निर्यात को नई उड़ान

व्यापार समझौते का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य और विलासिता (Luxury) क्षेत्र से जुड़ा है। भारत से अमेरिका को होने वाले लगभग 13 अरब डॉलर के दवा निर्यात को अब शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा, जो फार्मा सेक्टर के लिए संजीवनी साबित होगा। इसके साथ ही रत्न-आभूषण, हीरे, प्लैटिनम और घड़ियों जैसे कीमती सामानों को भी अमेरिकी बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। भविष्य की योजना साझा करते हुए गोयल ने बताया कि आने वाले समय में स्मार्टफोन, मशीनरी पार्ट्स और जेनेरिक दवाओं पर भी पूरी तरह टैरिफ खत्म करने पर विचार किया जा रहा है।

परस्पर लाभ: अमेरिका को भी मिली बाजार में रियायतें

यह समझौता द्विपक्षीय लाभ के सिद्धांत पर आधारित है। जहाँ भारत को निर्यात में छूट मिली है, वहीं अमेरिका से आने वाली कुछ औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों पर भारत भी टैक्स घटाएगा। इसमें प्रमुख रूप से पशु आहार, ट्री नट्स, सोयाबीन तेल और कुछ खास किस्म के फल शामिल हैं। इस डील को ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जिससे भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों में भी मजबूती आएगी।

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