Iran-US Conflict : ईरान की अमेरिका को महाविनाशक चेतावनी, ‘जमीन पर आए तो सैनिकों को बना देंगे राख’

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका पर धोखेबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि वाशिंगटन बातचीत की आड़ में जमीनी हमले की साजिश रच रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी सेना अमेरिकी सैनिकों को 'आग के हवाले' करने के लिए तैयार बैठी है। क्या यह महायुद्ध की शुरुआत है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 29, 2026

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Iran-US Conflict : ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष को अब एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। इस तनावपूर्ण माहौल में ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने अमेरिका को अब तक की सबसे कठोर चेतावनी दी है। गालिबफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अमेरिकी सेना ने ईरान की संप्रभु धरती पर कदम रखने की जुर्रत की, तो उनके सैनिकों को जिंदा जलाकर राख में तब्दील कर दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है और हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनी हुई हैं।

खर्ग द्वीप पर कब्जे की योजना: पेंटागन की रणनीतिक तैयारी का खुलासा

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ईरान के भीतर हफ्तों तक चलने वाले सीमित जमीनी सैन्य अभियानों (Ground Operations) की रूपरेखा तैयार कर रहा है। खुफिया सूचनाओं के मुताबिक, अमेरिका की योजना ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर नियंत्रण स्थापित करने और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरानी तटीय ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की है। अपनी इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अमेरिका ने हाल ही में ‘USS त्रिपोली’ युद्धपोत को अरब सागर में तैनात किया है, जो लगभग 3500 घातक मरीन सैनिकों और आधुनिक लड़ाकू विमानों से लैस है। अमेरिका की इस आक्रामक घेराबंदी ने पूरे मध्य पूर्व को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है।

ईरानी मीडिया का कड़ा संदेश: ‘Welcome to Hell’ से अमेरिका का स्वागत

ईरान के भीतर भी युद्ध को लेकर जनभावनाएं चरम पर हैं। ईरान के एक प्रमुख सरकारी अखबार ने अपने मुख्य पृष्ठ पर ‘Welcome to Hell’ (नरक में आपका स्वागत है) शीर्षक के साथ एक लेख प्रकाशित किया है, जिसे अमेरिकी सैन्य तैनाती के खिलाफ एक मनोवैज्ञानिक युद्ध माना जा रहा है। ईरानी नेतृत्व का दावा है कि उनकी मिसाइलें हर समय लॉन्च पैड पर तैयार हैं और वे केवल अमेरिकी सैनिकों के जमीनी हमले का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें ऐसा सबक सिखाया जा सके जिसे इतिहास याद रखे। गालिबफ ने दोहराया कि ईरान किसी भी दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा और अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक लड़ेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल: तेल आपूर्ति और व्यापार ठप

इस निरंतर बढ़ते संघर्ष का सीधा और विनाशकारी असर वैश्विक व्यापार पर दिखने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया की तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, अब युद्ध का मुख्य केंद्र बन चुका है। ईरान समर्थित समूहों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे हमलों और अमेरिका की जवाबी कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से दुनिया भर के देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। यदि यह युद्ध जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर शुरू होता है, तो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती है, जिससे विकसित और विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होंगी।

कूटनीतिक प्रयासों की विफलता: बातचीत के रास्ते हुए बंद?

यद्यपि स्थिति अत्यंत गंभीर है, लेकिन पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र जैसे क्षेत्रीय देश लगातार कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों के शीर्ष नेतृत्व ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की मेज पर आने की अपील की है। हालांकि, अब तक हुए तमाम प्रयास विफल साबित हुए हैं क्योंकि न तो अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति कम करने को तैयार है और न ही ईरान अपनी आक्रामक बयानबाजी से पीछे हट रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जारी यह गतिरोध संकेत दे रहा है कि आने वाले दिन इस क्षेत्र के लिए और भी अधिक विनाशकारी साबित हो सकते हैं।

मध्य पूर्व में महायुद्ध की आहट

एक महीने के इस कालखंड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संघर्ष केवल सीमावर्ती झड़पों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अमेरिका की जमीनी कार्रवाई की तैयारी और ईरान का ‘करो या मरो’ वाला रुख एक बड़े महायुद्ध की ओर इशारा कर रहा है। ‘USS त्रिपोली’ की तैनाती और खर्ग द्वीप को लेकर बनी रणनीति ने कूटनीति के दरवाजों पर ताले लगा दिए हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस चिंगारी को बुझाने में सफल होगा या फिर मध्य पूर्व वास्तव में एक ‘नरक’ में तब्दील हो जाएगा, जैसा कि ईरानी मीडिया ने चेतावनी दी है।

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