ट्रंप पर भड़का ईरान, दी सीधी चेतावनी: सावधान रहें, अंजाम खुद भुगतना पड़ सकता है

ईरान ईरान और अमेरिका के बीच जंग जारी है। गोला-बारूद के अलावा अब जुबानी हमले भी तेज हो गए हैं। बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि ट्रंप को अलर्ट रहना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वह खुद ही खत्म हो जाएं। गौरतलब है कि यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की

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Published On :

मार्च 10, 2026

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ईरान
ईरान और अमेरिका के बीच जंग जारी है। गोला-बारूद के अलावा अब जुबानी हमले भी तेज हो गए हैं। बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि ट्रंप को अलर्ट रहना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वह खुद ही खत्म हो जाएं। गौरतलब है कि यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से कहा गया है कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि ईरान के खिलाफ युद्ध अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस्लामी गणराज्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करता है तो लड़ाई और तेज हो सकती है। ट्रंप ने मियामी के पास अपने गोल्फ क्लब में रिपब्लिकन सांसदों से कहा कि हम कुछ शैतानी ताकतों को खत्म करने के इरादे से कुछ समय के लिए पश्चिम एशिया में थे और मुझे उम्मीद है कि यह सब जल्द खत्म हो जाएगा। इस बयान के कुछ घंटे बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के प्रवाह को रोकने वाला कोई भी कदम उठाता है तो अमेरिका उस पर अब तक की तुलना में बीस गुना अधिक जोरदार हमले करेगा।

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि अमेरिका के साथ बातचीत का अनुभव 'कड़वा' रहा है और अब उसके साथ नए सिरे से कूटनीतिक वार्ता की संभावना नहीं है। अराघची ने पीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका पर बार-बार विश्वासघात और सैन्य आक्रामकता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि अमेरिकियों से बातचीत या उनके साथ बातचीत करने का सवाल अब एजेंडे में होगा। हमारे लिए यह अनुभव बहुत कड़वा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पिछले वर्ष जून में अमेरिका के साथ अच्छे इरादे से बातचीत शुरू की थी, लेकिन बातचीत के दौरान ही उस पर हमला कर दिया गया। अराघची के अनुसार इस वर्ष भी अमेरिका ने यह भरोसा दिलाया था कि वह हमला नहीं करेगा और ईरान के परमाणु मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। विदेश मंत्री ने कहा कि तीन दौर की बातचीत में प्रगति के बावजूद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ता दल ने भी प्रगति को स्वीकार किया था, लेकिन इसके बावजूद हमला किया गया।

अराघची ने फारस की खाड़ी के देशों को संदेश देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमले आत्मरक्षा के अधिकार के तहत किये गये हैं। उन्होंने कहा कि यदि अन्य देश अपनी सुविधाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं तो ईरान को भी अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध ईरान ने नहीं चुना बल्कि उस पर थोपा गया है और देश केवल अपनी रक्षा कर रहा है। अराघची ने यह भी कहा कि ईरान जरूरत पड़ने तक मिसाइल हमले जारी रखने के लिए तैयार है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों के साथ संबंधों को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

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