Iran Missile Bases: अमेरिका-इजराइल के दावों की खुली पोल, ईरान ने शुरू किए मिसाइल ठिकाने

Iran Reopens Underground Missile Bases News: मध्य पूर्व से आ रही एक बड़ी खबर ने वाशिंगटन और तेल अवीव में खलबली मचा दी है! अमेरिका और इजराइल की खुफिया एजेंसियों के दावों को धता बताते हुए ईरान ने अपने कई प्रमुख भूमिगत बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों और परमाणु अनुसंधान केंद्रों को दोबारा पूरी तरह सक्रिय कर दिया है, जिससे वैश्विक रणनीतिक समीकरण बदल गए हैं।

Iran Missile Bases

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 1, 2026

Iran Missile Bases:  पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से यह बड़ा दावा किया था कि उनके लगातार हमलों ने ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह पंगु बना दिया है। हालांकि, हाल ही में सामने आईं नई और अत्याधुनिक सैटेलाइट तस्वीरें इन दावों से बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने भारी बमबारी के बावजूद बेहद साधारण मशीनों जैसे बुलडोजर और डंप ट्रकों की मदद से अपने कई महत्वपूर्ण भूमिगत (अंडरग्राउंड) मिसाइल ठिकानों को फिर से पूरी तरह सक्रिय कर लिया है। सैन्य विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि केवल सुरंगों के मुहाने नष्ट करके ईरान की विशाल मिसाइल ताकत को खत्म नहीं किया जा सकता है।

मलबे से मिसाइलें निकाल रहा ईरान

प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थान ‘सीएनएन’ (CNN) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान बहुत जल्द इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पहले से कहीं अधिक लंबी दूरी की मिसाइलें दागने की मजबूत स्थिति में आ रहा है। हमलों के रुकते ही ईरान ने मलबे के नीचे दबे अपने मिसाइल भंडारों को तेजी से बाहर निकालना शुरू कर दिया है। इससे पहले, कई हफ्तों तक अमेरिका और इजराइल की वायुसेना ने भीषण बमबारी करके ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल अड्डों की कनेक्टिविटी को पूरी तरह तोड़ दिया था, सड़कों को मलबे में तब्दील कर दिया था और सुरंगों के एंट्री गेट बंद कर दिए थे।

साधारण मशीनों से दिया अमेरिका के महंगे हथियारों को जवाब

सीएनएन ने अपनी खोजी रिपोर्ट में सैटेलाइट इमेजरी के हवाले से खुलासा किया है कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल के अरबों डॉलर के महंगे मिसाइल और हवाई अभियानों का जवाब महज कुछ बुलडोजरों और डंप ट्रकों जैसी कंस्ट्रक्शन मशीनों से दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से तेहरान ने साबित कर दिया है कि उसके हौसले और मिसाइल क्षमता को सिर्फ सुरंगों के गेट बंद करके ठप नहीं किया जा सकता। अगर दोनों पक्षों के बीच दोबारा शत्रुता या युद्ध शुरू होता है, तो ईरान के पास बिना किसी रुकावट के लगातार मिसाइलें दागते रहने की पर्याप्त और मारक क्षमता आज भी सुरक्षित मौजूद है।

जब तक लॉन्चर और टीमें सुरक्षित हैं, तब तक मिसाइल दागता रहेगा तेहरान

सामरिक मामलों के विशेषज्ञों का गणित है कि भले ही भीषण युद्ध के कारण ईरान में नई मिसाइलों के कारखाने और उत्पादन इकाइयां अस्थायी रूप से रुक गई हों, लेकिन जब तक उसके पास मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और उन्हें ऑपरेट करने वाली कुशल टीमें बची हुई हैं, तब तक वह हमलों को अंजाम देता रहेगा। ईरान के पास पहले से ही विभिन्न श्रेणियों की मिसाइलों का एक बहुत बड़ा और सुरक्षित भंडार मौजूद है। युद्ध के चरम काल के दौरान भी ईरान ने भारी हवाई खतरे के बीच अपने सैनिकों की जान दांव पर लगाकर सुरंगों के प्रवेश द्वारों को दोबारा खोदने और उन्हें चालू करने का काम जारी रखा था।

हमलों के बावजूद ईरान ने जारी रखी थी खुदाई

अमेरिकी और इजराइली खुफिया एजेंसियां युद्ध के दौरान अक्सर ईरान की इस खुदाई में इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरणों को ड्रोन से निशाना बनाती थीं, फिर भी ईरान ने यह काम रुकने नहीं दिया। इसी अदम्य साहस और जमीनी इंजीनियरिंग की बदौलत ईरान पूरे युद्ध के दौरान जवाबी मिसाइलें दागने में सफल रहा, भले ही तब उनकी संख्या पहले के मुकाबले थोड़ी कम थी। अब दोनों पक्षों के बीच सीजफायर (युद्धविराम) हुए सात सप्ताह से ज्यादा का समय बीत चुका है। इस शांति काल का फायदा उठाकर ईरान ने अपने सभी क्षतिग्रस्त ठिकानों की खुदाई और मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है।

69 में से 50 सुरंगों के प्रवेश द्वार दोबारा खोले

सीएनएन की विस्तृत जांच में यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है कि अमेरिका और इजराइल ने अपनी साझा बमबारी में ईरान के 18 अंडरग्राउंड मिसाइल बेस के जिन 69 मुख्य सुरंग प्रवेश द्वारों को मलबे से पाट दिया था, उनमें से 50 प्रवेश द्वारों को ईरानी इंजीनियरों ने दोबारा सफलतापूर्वक खोल दिया है। इसके अलावा, ईरान ने उन रणनीतिक संपर्क सड़कों की भी मरम्मत कर ली है, जिन्हें पश्चिमी देशों ने इसलिए निशाना बनाया था ताकि भारी मिसाइल लॉन्चर बाहर न आ सकें। सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि बमबारी से बने लगभग सभी गहरे गड्ढे भरे जा चुके हैं और कई सड़कों पर दोबारा पक्की डामर की परत बिछा दी गई है।

ईरान के अभेद्य भूमिगत बंकरों में आज भी सुरक्षित हैं 1,000 से अधिक मिसाइलें

इस पूरी सैटेलाइट मैपिंग और जमीनी इनपुट के बाद वैश्विक सैन्य विश्लेषकों का अंतिम निष्कर्ष यह है कि ईरान के पहाड़ों को काटकर बनाए गए अभेद्य भूमिगत बंकरों और ‘मिसाइल सिटीज’ के भीतर आज भी लगभग 1,000 से अधिक घातक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें पूरी तरह सुरक्षित और चालू हालत में रखी हुई हैं। पश्चिमी देशों के महंगे हवाई हमले ईरान के इस मुख्य आक्रामक ढांचे को छू भी नहीं सके हैं। ऐसे में ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह समाप्त मान लेना अमेरिका और इजराइल की एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो सकती है, जो भविष्य में भारी पड़ सकती है।

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