Jhalawar School Collapse: राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र स्थित पीपलोड़ी गांव के राजकीय गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा हो गया. बच्चों की सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान अचानक स्कूल की छत गिर गई, जिसमें 7 बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई और 30 से अधिक बच्चे घायल हो गए. बताया जा रहा है कि इनमें से दो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है.
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20 साल पुराना था भवन, बारिश से हुआ कमजोर

मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल का भवन करीब 20 साल पुराना था और हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण उसकी हालत और खराब हो गई थी. बारिश की वजह से दीवारों में दरारें आ गई थी, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं कई गई. स्थानी लोगों ने पहले भी इस भवन की जर्जर स्थिति को लेकर प्रशासन से शिकायतें की थी, लेकिनव कोई कार्रवाई नहीं हुई.
60 बच्चे थे स्कूल में मौजूद, स्थानीय लोगों ने मलबे से निकाले घायल
आपको बता दे कि, जिस समय हादसा हुआ उस समय स्कूल में लगभग 60 बच्चे मौजूद थे. जैसे ही छत गिरी, स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय ग्रामीण, शिक्षक , पुलिस और प्रशासन ने तुरंत मिलकर रात कार्य शुरु किया और मलबे में दबे बच्चों को बाहर निकाला. सभी घायल बच्चों को आनन-फानन मनोहर थाना स्थित सामुदायिक स्वास्थाय केंद्र में प्राथिमक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर रूप से घायलों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है.
मॉनसून से पहले दी गई थी एडवाइजरी, फिर भी लापरवाही
राजस्थान में इस साल सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है. शिक्षा निदेशक ने बताया कि मॉनसून से पहले ही सभी स्कूलों को एडवाइजरी जारी की गई थी, जिसमें जर्जर भवनों की जांच और मरम्मत के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद पीपलोड़ी गांव के इस स्कूल की हालत पर ध्यान नहीं दिया गया. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या समय रहते भवन की जांच और मरम्मत नहीं की जानी चाहिए थी?
मुख्यमंत्री ने जताया दुख, जांच के दिए आदेश

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक जताया है और तत्काल जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री स्वयं पीड़ित परिवारों से मिलने और स्कूल का निरीक्षण करने के लिए घटनास्थल का दौरा करेंगे. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सभी घायलों को बेहतर इलाज और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने की बात कही है. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस घटना को बच्चों की “हत्या” करार दिया. दूसरी ओर, भाजपा नेता मदन राठौड़ ने आग्रह किया है कि इस हादसे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी से बचा जाए.
सवालों के घेरे में सरकारी व्यवस्था
यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है. क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए समय रहते कार्रवाई की जाएगी या फिर फिर से मासूमों की जान जाने के बाद ही जागेगा सिस्टम?