Kalkaji Temple: सिद्धपीठ कालकाजी में सजेगा मां का दरबार, श्रद्धालुओं के लिए बिछा सुरक्षा का जाल, जानें प्रवेश और निकास के नए नियम

सिद्धपीठ कालकाजी मंदिर में नवरात्र की भव्य तैयारियां! लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए 500 सेवादार और भारी सुरक्षा बल तैनात। मंदिर प्रशासन ने सुचारु दर्शन के लिए 3 प्रवेश द्वार और विशेष 'क्राउड मैनेजमेंट प्लान' तैयार किया है। सुरक्षा के मद्देनजर दंडवत यात्रा, ध्वज और साउंड सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 18, 2026

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Kalkaji Temple: राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक और सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ कालकाजी मंदिर में आगामी नवरात्र पर्व को लेकर तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। मां कालका के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंदिर प्रशासन ने इस बार एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक, हर पहलू पर बारीकी से काम किया गया है ताकि भक्तों को सुगम दर्शन प्राप्त हो सकें।

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सुनियोजित भीड़ प्रबंधन और सेवादारों की तैनाती

Kalkaji Temple
सिद्धपीठ कालकाजी में सजेगा मां का दरबार

कालकाजी मंदिर प्रबंधक सुधार कमिटी के अध्यक्ष लोकेश भारद्वाज के अनुसार, नवरात्र के दौरान मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। इसे देखते हुए प्रवेश और निकास के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।

भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी इस बार एक बड़ी टीम के कंधों पर होगी:

500 से अधिक सेवादार: इन्हें अलग-अलग शिफ्टों में तैनात किया जाएगा, जो दिन-रात श्रद्धालुओं की कतारों को व्यवस्थित रखेंगे।

सुरक्षा घेरा: मंदिर परिसर की निगरानी के लिए 100 से ज्यादा प्रशिक्षित निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।

पुलिस और अर्धसैनिक बल: दिल्ली पुलिस के सैकड़ों जवानों के साथ-साथ पीएसी (PAC) और पैरामिलिट्री फोर्स की कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाएंगी।

सुगम दर्शन के लिए तीन मुख्य प्रवेश द्वार

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने प्रवेश के लिए तीन अलग-अलग दिशाओं से मार्ग निर्धारित किए हैं, जिससे किसी एक जगह पर दबाव न बढ़े:

राम प्याऊ (शंभूदयाल) मार्ग: मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में यहां व्यापक बैरिकेडिंग और कतार प्रणाली लागू की जाएगी।

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ओखला साइड: दक्षिणी दिल्ली और आसपास से आने वाले भक्तों के लिए यह मार्ग बेहद सुविधाजनक रहेगा।

लोटस टेंपल मार्ग: नेहरू प्लेस और लोटस टेंपल की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह तीसरा एंट्री पॉइंट बनाया गया है।

दर्शन के पश्चात भक्तों के बाहर निकलने के लिए ओखला मार्ग और महंत परिसर को निकास द्वार (Exit Gates) के रूप में चिन्हित किया गया है।

सुरक्षा के मद्देनजर सख्त पाबंदियां

मंदिर की मर्यादा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रशासन ने कुछ कड़े फैसले लिए हैं। नवरात्र के दौरान निम्नलिखित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा:

दंडवत यात्रा: हाथों में दीया लेकर या दंडवत करते हुए यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी।

ध्वज और साउंड सिस्टम: मंदिर परिसर के भीतर बड़े ध्वज (झंडे) ले जाने और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के उपयोग पर रोक लगा दी गई है।

उपाध्यक्ष नीरज भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि इन नियमों का उद्देश्य केवल व्यवस्था बनाए रखना है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने और हर भक्त शांतिपूर्ण ढंग से मां के दर्शन कर सके। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर के सेवादारों और सुरक्षाकर्मियों का सहयोग करें।

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