Karnataka Congress: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़े नेतृत्व परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ नई दिल्ली में हुई वन-टू-वन बैठक के बाद राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पहुंचने से पहले ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को राज्य के हालात और हाईकमान के कड़े रुख का अंदाजा हो गया था, जिसके चलते वे बेहद खास और आक्रामक रणनीति के साथ राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे थे।
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मंत्रियों की फौज लेकर दिल्ली पहुंचे थे सिद्धारमैया
अपनी स्थिति को मजबूत करने और आलाकमान पर दबाव बनाने के लिए सिद्धारमैया एक सोची-समझी रणनीति के तहत दिल्ली पहुंचे थे। सिद्धारमैया सामान्य रूप से अकेले जाने के बजाय अपने साथ कर्नाटक कैबिनेट के करीब एक दर्जन (12) वरिष्ठ मंत्रियों को एक विशेष विमान (स्पेशल फ्लाइट) से दिल्ली लेकर गए थे। माना जा रहा है कि मंत्रियों की यह फौज आलाकमान के सामने अपना भारी राजनीतिक समर्थन और ताकत दिखाने का जरिया थी। उनकी मुख्य योजना बैठक में सबसे पहले कैबिनेट फेरबदल की मांग को आगे रखने की थी।
यदि पार्टी नेतृत्व उनकी मांगों से असहमत होता, तो वे अपने साथ आए इन वरिष्ठ मंत्रियों को चर्चा की मेज पर लाकर अपनी दलीलों और दावों को और मजबूत करने वाले थे।
बैठक में पलटा पासा
हाईकमान के सामने अपनी ताकत दिखाने की सिद्धारमैया की यह योजना दिल्ली पहुंचते ही धरी की धरी रह गई। राहुल गांधी के साथ हुई इस गुप्त और बेहद अहम बैठक का घटनाक्रम पूरी तरह से उलट गया। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से उनकी कोई राय या दलील नहीं मांगी, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर पार्टी के अंतिम फैसले से अवगत करा दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर देखना चाहती है। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ें और राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका संभालें।
राज्यसभा जाने के प्रस्ताव पर सिद्धारमैया असमंजस में
इस अचानक और सीधे निर्देश के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अपनी बात को विस्तार से रखने का ज्यादा मौका नहीं मिल सका। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने राज्यसभा जाने और दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने के इस प्रस्ताव पर तुरंत सहमति नहीं दी। उन्होंने केवल इतना कहा कि वर्तमान में उनकी राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बनने की कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं है। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के आदेश को देखते हुए उन्होंने इस पूरे विषय पर सोच-विचार करने और अंतिम फैसला लेने के लिए कुछ समय की मांग की। इसके तुरंत बाद बैठक समाप्त हो गई और उन्हें अपना फैसला कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल को सूचित करने के लिए कहा गया।
क्या गुरुवार को होगा कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री का फैसला?
बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सीधे अपने करीबी और राज्य के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज के दिल्ली आवास पर पहुंचे, जहाँ उनके साथ आए बाकी मंत्री पहले से मौजूद थे। मंत्रियों के साथ बेहद गंभीर माहौल में हुई इस चर्चा में सिद्धारमैया ने साफ शब्दों में कहा कि हाईकमान अपने निर्णय पर पूरी तरह अडिग है और पीछे हटने के मूड में नहीं है। उन्होंने मंत्रियों से यह भी साझा किया कि उन्हें आलाकमान के सामने अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर भी नहीं मिल पाया।
इसके बाद सिद्धारमैया बिना किसी देरी के बेंगलुरु के लिए रवाना हो गए। सूत्रों के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल को एक शुरुआती संदेश भेजा गया है कि मुख्यमंत्री फिलहाल राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, पूरे घटनाक्रम पर अंतिम फैसला लेने के लिए उन्होंने गुरुवार तक का समय माँगा है। अब पूरे देश की नजरें गुरुवार को होने वाले फैसले पर टिकी हैं कि क्या कर्नाटक को एक नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है।
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