Ramalinga Reddy Resignation: शपथ के 72 घंटे बाद ही मुसीबत में कर्नाटक सरकार, मंत्री के इस्तीफे से डगमगाई डीके सरकार?

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के गठन के महज तीन दिन बाद ही बड़ा सियासी संकट खड़ा हो गया है। पोर्टफोलियो आवंटन से नाराज वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रेड्डी का आरोप है कि उन्हें वादे के मुताबिक मंत्रालय नहीं मिला। इस झटके ने डीके शिवकुमार सरकार की स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

Ramalinga Reddy Resignation

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 5, 2026

Ramalinga Reddy Resignation:  कर्नाटक में कांग्रेस की नई सरकार के गठन के चंद दिनों के भीतर ही मुश्किलें शुरू हो गई हैं। 3 जून को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के 12 से अधिक सदस्यों ने शपथ ली थी, लेकिन सरकार अभी ठीक से काम करना शुरू भी नहीं कर पाई थी कि कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यह घटनाक्रम डी.के. शिवकुमार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनके कार्यकाल की शुरुआत इतनी जल्दी किसी बड़े आंतरिक विवाद के साथ होगी।

पोर्टफोलियो आवंटन से नाराज रामलिंगा रेड्डी ने छोड़ा मंत्री पद

बताते चले कि, रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे की मुख्य वजह विभाग का आवंटन है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें परिवहन मंत्रालय सौंपा गया था, जिससे वे कतई खुश नहीं थे। अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी अन्य मंत्रालय का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के नेतृत्व में बायराथी सुरेश ने उन्हें फोन पर ‘बेंगलुरु विकास मंत्रालय’ देने का वादा किया था। रामलिंगा रेड्डी का दावा है कि डी.के. शिवकुमार ने भी मुख्यमंत्री बनने से पहले उनके आवास पर जाकर उन्हें बेंगलुरु विकास मंत्रालय देने की बात दोहराई थी, लेकिन अंतिम सूची में उन्हें ‘सिंचाई मंत्रालय’ दे दिया गया।

अब मंत्रालय स्वीकार करने से इनकार

अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं इन मंत्रालयों की मांग नहीं की थी, बल्कि शीर्ष नेतृत्व ने स्वेच्छा से उन्हें बेंगलुरु का प्रभार देने का वादा किया था। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उन्हें आलाकमान, मुख्यमंत्री या उप-मुख्यमंत्री से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। उन्होंने अपना इस्तीफा एसीएस तुषार गिरिनाथ के जरिए भिजवा दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार अब उन्हें मनाने के लिए ‘बेंगलुरु विकास मंत्रालय’ भी पेश करती है, तो भी वे उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

चुनौतियों का दौर शुरू

डी.के. शिवकुमार के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद सत्ता संभालने वाले शिवकुमार के सामने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को संतुष्ट रखने की बड़ी चुनौती है। मंत्री का यह इस्तीफा दर्शाता है कि कर्नाटक कांग्रेस में गुटबाजी और पद की महत्वाकांक्षा अभी भी बरकरार है। शपथ ग्रहण के महज तीन दिन के भीतर आए इस इस्तीफे ने यह साबित कर दिया है कि मुख्यमंत्री के रूप में डी.के. शिवकुमार का रास्ता कांटों भरा रहने वाला है और उन्हें अपनी सरकार की स्थिरता बनाए रखने के लिए जल्द ही डैमेज कंट्रोल करना होगा।