LPG Shortage: ईरान-इजरायल संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की रसोई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खाड़ी देशों से होने वाली एलपीजी सप्लाई में भारी गिरावट और देश के भीतर घटते स्टॉक को देखते हुए केंद्र सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) घरेलू गैस सिलेंडर के वजन और वितरण नीति में एक क्रांतिकारी बदलाव करने पर विचार कर रही हैं।
रसोई गैस सिलेंडर के वजन में कटौती की तैयारी
आने वाले समय में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, अब मानक 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर के बजाय उपभोक्ताओं को केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर सप्लाई करने की योजना बनाई जा रही है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध गैस के सीमित भंडार को देश के ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुँचाना है, ताकि किसी भी घर में ईंधन की पूर्ण किल्लत न हो।
पश्चिम एशिया युद्ध और ईंधन आपूर्ति में बाधा
इस बड़े फैसले के पीछे का प्राथमिक कारण ईरान और उसके आसपास के क्षेत्रों में छिड़ा युद्ध है। इस भू-राजनीतिक तनाव की वजह से ‘होर्मुज स्ट्रेट’ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों से होने वाली सप्लाई बाधित हो गई है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के कई एलपीजी टैंकर इस समय पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) में फंसे हुए हैं, जिससे देश के ऊर्जा सुरक्षा ढांचे पर अप्रत्याशित दबाव बढ़ गया है।
नए स्टिकर और पारदर्शी मूल्य निर्धारण नीति
यदि यह प्रस्तावित योजना धरातल पर उतरती है, तो वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी सिलेंडरों पर नए विशेष स्टिकर लगाए जाएंगे। इन स्टिकर्स पर गैस की संशोधित मात्रा (10 किलो) की स्पष्ट जानकारी अंकित होगी। राहत की बात यह है कि उपभोक्ताओं को पूरे 14.2 किलो के पैसे नहीं देने होंगे; कीमत में भी उसी अनुपात में कटौती की जाएगी, जिससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त भार न पड़े। हालांकि, इसके कार्यान्वयन के लिए बॉटलिंग प्लांट्स में तकनीकी अपडेट और नियामक संस्थाओं की हरी झंडी अनिवार्य होगी।
भारत का घटता एलपीजी भंडार और आयात चुनौतियां
वर्तमान में भारत की सप्लाई चेन गंभीर संकट से गुजर रही है। आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में केवल दो जहाज लगभग 92,700 टन गैस लेकर भारतीय तटों तक पहुँच पाए हैं, जो कि देश की मात्र एक दिन की औसत खपत के बराबर है। ज्ञात हो कि भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60% हिस्सा विदेशों, विशेषकर खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर सीधे भारतीय रसोई तक पहुँच रहा है।
घरेलू गैस संरक्षण और पेट्रोलियम मंत्रालय की अपील
पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रतिदिन लगभग 93,500 टन एलपीजी की खपत होती है, जिसका 86% हिस्सा सीधे घरेलू उपयोग में जाता है। हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सप्लाई नियमित रखी जा रही है, लेकिन भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए गैस संरक्षण (Fuel Saving) पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है ताकि ऊर्जा संकट को गहराने से रोका जा सके।









