Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम में एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया। मंगलवार की सुबह लगभग साढ़े तीन बजे एक धर्मशाला की दीवार गिरने से उत्तर प्रदेश की एक महिला की मौत हो गई, जबकि कई श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
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बारिश और बिजली गिरने से गिरी दीवार
मिली जानकारी के अनुसार, घटना के पीछे का कारण मंगलवार की सुबह हुई तेज बारिश और बिजली गिरना बताया जा रहा है। तेज गर्जना और बारिश की वजह से दीवार कमजोर होकर गिर गई। जानकारी के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु बागेश्वर धाम में दर्शन करने आते हैं और वही धर्मशालाओं में ठहरते हैं। सोमवार को भी कई श्रद्धालु इस धर्मशाला में रुके हुए थे। इसी दौरान यह दुखद हादसा हो गया।
पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लिया
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। मृत महिला की पहचान उत्तर प्रदेश निवासी के रूप में की गई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इससे पहले भी हुआ था बड़ा हादसा
गौरतलब है कि इससे पहले भी बागेश्वर धाम में हादसा हो चुका है। 3 जुलाई को सुबह आरती के दौरान टिन शेड गिरने की घटना हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और छह से अधिक लोग घायल हो गए थे। वह हादसा भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और अस्थायी ढांचों की कमजोरी की वजह से हुआ था। मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले निवासी श्यामलाल कौशल के रूप में हुई थी, जो पंडित धीरेंद्र शास्त्री के जन्मोत्सव में शामिल होने आए थे।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
बताते चले कि, लगातार हो रहे हादसों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बागेश्वर धाम में देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, लेकिन व्यवस्थाएं इस भीड़ को संभालने में नाकाम साबित हो रही हैं। स्थानीय लोगों और भक्तों ने प्रशासन से अपील की है कि वह सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करें और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए।
बागेश्वर धाम में बार-बार हो रहे हादसे प्रशासन की लापरवाही की ओर इशारा करते हैं। श्रद्धालुओं की जान की कीमत पर हो रहे आयोजनों की व्यवस्थाओं की समीक्षा और पुनर्गठन जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों।