शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, रोहतक के 63 निजी स्कूलों पर दाखिले रुके अब

 रोहतक  शिक्षा विभाग ने नियमों की अनदेखी करने वाले और मनमाने तरीके से चल रहे निजी स्कूलों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने जिले के 63 निजी स्कूलों के एमआईएस (स्कूल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम) पोर्टल को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। पोर्टल बंद होने के साथ ही इन स्कूलों में नए विद्यार्थियों के दाखिले पर पूरी तरह रोक लग गई है। विभाग की ओर से यह सख्त कदम स्कूलों द्वारा मान्यता संबंधी नियमों, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करने पर उठाया गया

Wrriten By :

Editor

Published On :

जुलाई 13, 2026

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 रोहतक
 शिक्षा विभाग ने नियमों की अनदेखी करने वाले और मनमाने तरीके से चल रहे निजी स्कूलों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने जिले के 63 निजी स्कूलों के एमआईएस (स्कूल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम) पोर्टल को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है।

पोर्टल बंद होने के साथ ही इन स्कूलों में नए विद्यार्थियों के दाखिले पर पूरी तरह रोक लग गई है। विभाग की ओर से यह सख्त कदम स्कूलों द्वारा मान्यता संबंधी नियमों, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करने पर उठाया गया है। विभाग ने इन सभी 63 स्कूलों को ब्लैकलिस्ट की श्रेणी में डाल दिया है।

प्रदेश भर में 1100 से अधिक स्कूलों पर गाज
शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई केवल रोहतक तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर हंटर चला है। प्रदेश भर में विभाग ने 145 अस्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों के पोर्टल बंद किए हैं।

269 परमिशन प्राप्त स्कूलों पर ताला (पोर्टल ब्लाक) लगाया है। 693 स्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों पर भी कार्रवाई की गई है, जिन्होंने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों का विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था।

जिले के 63 स्कूलों का पूरा समीकरण
अस्थाई मान्यता प्राप्त स्कूल: 22 स्कूल, जो समय सीमा के बाद भी मानक पूरे नहीं कर पाए।
बिना अनुमति संचालित स्कूल: 10 स्कूल, जो बिना किसी विभागीय परमिशन के चल रहे थे।
आरटीई नियमों का उल्लंघन: 31 स्कूल, जिन्होंने आरटीई सत्र की अनिवार्य प्रक्रिया पूरी नहीं की थी।

आवासीय मकानों में चल रहे थे स्कूल, खेल मैदान भी गायब
शिक्षा विभाग की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कई स्कूल निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर आवासीय मकानों में संचालित हो रहे थे। जांच में सामने आई मुख्य कमियां आवश्यक भूमि और भवन संबंधी सरकारी मानकों का अभाव।

पर्याप्त कक्षाओं, खेल मैदानों और अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था की भारी कमी। आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों का विवरण शिक्षा निदेशालय को न देना।

दस्तावेज पूरे होने के बाद ही मिलेगी राहत
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन स्कूलों को पहले भी कई बार नोटिस जारी कर दस्तावेज पूरे करने का मौका दिया गया था। प्रदेश के करीब 413 स्कूलों को अतिरिक्त समय भी मिला था, लेकिन संतोषजनक जवाब और दस्तावेज न मिलने पर यह कदम उठाया गया।

अब जब तक ये स्कूल मान्यता, भूमि, भवन और सुरक्षा संबंधी कमियां दूर कर फाइल दोबारा जमा नहीं करेंगे, तब तक इनका पोर्टल नहीं खुलेगा। इससे इन स्कूलों की आरटीई प्रवेश प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप रहेंगे।

शिक्षा विभाग की ओर से अस्थाई मान्यता प्राप्त व मानकों और आरटीई अधिनियम से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न करवाने वाले निजी स्कूलों पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। विभाग ने उनके एमआईएस पोर्टल बंद कर दिए हैं। इन स्कूलों को पहले अपनी कमियां दूर करनी होंगी, उसके बाद ही आगामी समीक्षा की जाएगी। -बिजेंद्र हुड्डा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रोहतक।