Malda Kaliachak Case: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हिंसक हमले के मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। कालियाचक ब्लॉक-2 में हुई इस सनसनीखेज वारदात की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और भारतीय निर्वाचन आयोग की सिफारिश के बाद लिया गया है। इस हिंसा ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और चुनाव आयोग का फैसला
गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया था कि यदि आवश्यकता हो, तो निर्वाचन आयोग जांच एजेंसी का चयन कर सकता है। इसके तुरंत बाद, इलेक्शन कमीशन ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसे सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया। मालदा कालियाचक घटना के सिलसिले में अब तक कुल 18 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
मतदाता सूची विवाद और न्यायिक अधिकारियों का घेराव
यह पूरा विवाद बुधवार को उस समय शुरू हुआ जब मालदा के कालियाचक-II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस (BDO) के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारी SIR (Summary Internal Revision) के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। स्थिति तब बेकाबू हो गई जब भीड़ ने वहां मौजूद 7 न्यायिक अधिकारियों से मिलने की जिद की। मांग पूरी न होने पर उग्र प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को बंधक जैसी स्थिति में घेर लिया और उनके साथ अभद्रता की गई।
नेशनल हाईवे-12 पर चक्काजाम और बीएसएफ कैंप के पास तनाव
बुधवार की घटना के बाद भी क्षेत्र में शांति बहाल नहीं हो सकी और गुरुवार सुबह एक बार फिर विरोध की आग भड़क उठी। ओल्ड मालदा ब्लॉक के मंगलबाड़ी इलाके में स्थित नारायणपुर बीएसएफ कैंप के पास प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों के जमावड़े के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवाजाही ठप हो गई। यह प्रदर्शन मालदा के इंग्लिश बाजार क्षेत्र के जदुपुर इलाके तक फैल गया, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
पुलिस पर पथराव और सुरक्षाबलों के साथ हिंसक झड़प
जब पुलिस की टीम हाईवे से जाम हटाने और यातायात सुचारू करने पहुंची, तो भीड़ और अधिक हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर भारी पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में पुलिस की गाड़ियों को काफी नुकसान पहुँचा और एक वाहन का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन भीड़ हाईवे से हटने को तैयार नहीं थी, जिससे स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी रही।
सीबीआई जांच से खुलेगा साजिश का राज
मामले को सीबीआई को सौंपे जाने का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या यह हमला स्वतःस्फूर्त था या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश थी। न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाना न्यायपालिका की गरिमा पर हमला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सीबीआई की टीम मालदा पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना करेगी और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ करेगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची सुधार के काम में किसी भी प्रकार की हिंसा या बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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