Mamata Banerjee FIR: सनातन को कहा था ‘गंदा धर्म’, अब हार के बाद दर्ज हुई FIR, बिखर गई TMC!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कानूनी तौर पर काफी बढ़ गई हैं।

Mamata Banerjee FIR

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 27, 2026

Mamata Banerjee FIR: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चौतरफा संकटों से घिर गई हैं। एक तरफ जहां उनके राजनीतिक वजूद को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल खड़े होने लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके एक पुराने विवादित बयान ने उनकी कानूनी मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। ममता बनर्जी पर एक सार्वजनिक मंच से हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और सनातन को ‘गंदा धर्म’ बताने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।

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सिलीगुड़ी साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुआ मामला

पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ यह कानूनी कार्रवाई धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपों के तहत की गई है। सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर सिलीगुड़ी की ही एक महिला अधिवक्ता (वकील) रिंकी चटर्जी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई है।

शिकायतकर्ता वकील रिंकी सिंह ने मीडिया को बताया कि ममता बनर्जी के रसूख के कारण स्थानीय पुलिस शुरुआत में यह मामला और शिकायत दर्ज करने से लगातार कतरा रही थी। काफी प्रयासों और कानूनी दबाव के बाद आखिरकार पुलिस को यह एफआईआर लिखनी पड़ी।

कोलकाता के रेड रोड पर ईद कार्यक्रम से जुड़ा है पूरा विवाद

शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला साल 2025 का है। उस दौरान कोलकाता के प्रसिद्ध रेड रोड पर ईद-उल-फितर की नमाज का एक भव्य और आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें बतौर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शिरकत की थी।

आरोप है कि इस कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने न केवल मुस्लिम रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन किया, बल्कि उसी सार्वजनिक मंच से बहुसंख्यक समाज की आस्था का मजाक उड़ाते हुए हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति को लेकर बेहद आपत्तिजनक और मर्यादित सीमाओं से बाहर जाकर टिप्पणियां की थीं।

महिला वकील का यह भी आरोप है कि टीएमसी के कई अन्य शीर्ष नेताओं ने भी समय-समय पर हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अमर्यादित बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी उन्होंने इन विवादित बयानों के खिलाफ कानूनी आवाज उठाने या एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, तो सत्ता के दबाव में उन्हें अपमानित किया गया और उनकी शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में मची भारी खलबली

चुनावी नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल की सियासत में भूचाल आया हुआ है। करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर ममता बनर्जी और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ असंतोष की आवाजें तेज हो गई हैं।

जमीनी स्तर पर स्थिति इतनी विस्फोटक हो चुकी है कि टीएमसी के कई कद्दावर नेता और जमीनी कार्यकर्ता अब पार्टी से पूरी तरह किनारा करने और सुरक्षित राजनीतिक ठिकानों की तलाश में जुट गए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह पुख्ता दावा किया जा रहा है कि पार्टी में मची इस भारी उठापटक और आंतरिक कलह के बीच टीएमसी के करीब 100 स्थानीय पार्षदों (Councilors) ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दे दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर माना जा रहा है।

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